सैलरी और सामाजिक दायित्वों को पूरा करने में खर्च हो रहा रेलवे का बड़ा फंड: पीयूष गोयल

पीयूष गोयल ने कहा कि रेलवे साफ-सफाई, उपनगरीय ट्रेन चालने और गेज बदलाव पर भी काफी खर्च कर रहा है.

रेलमंत्री पीयूष गोयल ने सातवें वेतन आयोग में बढ़े सैलरी और पेंशन समेत सामाजिक दायित्वों को रेलवे के बढ़े बोझ का जिम्मेदार बताया है. रेलमंत्री ने लोकसभा में कहा कि सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद से रेलवे कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर 22 हजार करोड़ रुपये अधिक खर्च कर रहा है, जिससे वित्तीय स्वास्थ्य पर असर पड़ा है.

दरअसल, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रेलवे की कमाई 10 साल पिछे चली गई है. पिछले वित्तीय वर्ष रेलवे का परिचालन अनुपात 100 रुपये कमाने के लिए लगभग 98 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं.

पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि सामाजिक दायित्वों के लिए कुछ ऐसे इलाकों नई लाइनों के निर्माण कर ट्रेन चलाई जा रही है जिससे नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. इसमें फंड का बड़ा हिस्सा खर्च भी हो रहा है.

उन्होंने कहा कि रेलवे साफ-सफाई, उपनगरीय ट्रेन चालने और गेज बदलाव पर भी काफी खर्च कर रहा है. इन सबका खर्च है और इसका रेलवे पर असर पड़ता है.

गोयल ने कहा, “जब हम पूरे पिक्चर को देखते हैं, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करना और सामाजिक दायित्व के तहत ट्रेनों को चलाने से ऑपरेटिंग रेशियो एक साल में 15 पर्सेंट नीचे चला जाता है. समय आ गया है कि हम सामाजिक दायित्वों पर खर्च और लाभकारी सेक्टर्स के लिए बजट को अलग करने की संभावना तलाशें.”

कैग की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रेल का परिचालन अनुपात वित्त वर्ष 2017-18 में 98.44 प्रतिशत रहने का मुख्य कारण पिछले वर्ष 7.63 प्रतिशत संचालन व्यय की तुलना में उच्च वृद्धि दर का 10.29 प्रतिशत रहना है.

वित्त वर्ष 2008-09 में रेलवे का परिचालन अनुपात 90.48 प्रतिशत था, जो 2009-10 में 95.28 प्रतिशत, 2010-11 में 94.59 प्रतिशत, 2011-12 में 94.85 प्रतिशत, 2012-13 में 90.19 प्रतिशत, 2013-14 में 93.6 प्रतिशत, 2014-15 में 91.25 प्रतिशत, 2015-16 में 90.49 प्रतिशत, 2016-17 में 96.5 प्रतिशत तथा 2017-18 में 98.44 प्रतिशत दर्ज हुआ.

ये भी पढ़ें-

106 दिन बाद तिहाड़ से बाहर आते ही चिदंबरम ने कही ये बात

चिन्मयानंद पर रेप का आरोप लगाने वाली छात्रा को राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली जमानत