विवादित और बड़बोले बयानों से बचने के लिए पीएम मोदी ने सांसदों को क्या टिप्स दी, पढ़िए

पीएम मोदी ने अपने लंबे राजनीतिक करियर से हासिल कई टिप्स सांसद बनकर पहुंचे नेताओं को दिए. इनमें सबसे खास था मीडिया हैंडलिंग को लेकर उनके द्वारा ली गई क्लास.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के सेंट्रल हॉल में एनडीए का नेता चुने जाने के मौके पर कई अहम बातें बोलीं. अपने पिछले कार्यकाल को याद करने और देश की जनता को बहुमत देने पर शुक्रिया करने के अलावा उन्होंने सांसद बनकर आए नेताओं को कई नसीहतें दीं.

कई हिदायतों के बीच मोदी ने सांसदों को मीडिया से बात करते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी. उन्होंने 2014 से 2019 के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि किसी मंत्री या मंत्रालय को लेकर विरोधी भी बड़ा तूफान नहीं खड़ा कर सके मगर मसाला अगर दिया तो हमने ही दिया. जो बड़बोलापन होता है और टीवी का जो माइक होता है उसमें ताकत होती है कि लोग कुछ भी बोल देते हैं.

पीएम ने ये भी कहा कि कुछ भी बोल देने से उनकी दुकानें चलती हैं और हमारी मुसीबतें बढ़ती हैं.

उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोगों को मैने देखा है कि जब तक सुबह उठकर राष्ट्र के नाम संदेश नहीं देते उन्हें चैन नहीं पड़ता. मीडिया वालों को भी पता होता है कि कुछ नमूने होते हैं और वो उनके दरवाज़े के बाहर खड़े रहते हैं कि ये बाहर निकलेगा तो कुछ बोलेगा. इस वजह से हमारे खाते में ऐसी चीज़ें इकट्ठी हो जाती हैं जिनका हमसे लेनादेना नहीं.

मोदी ने इस मौके पर लालकृष्ण आडवाणी की नसीहत भी याद करते हुए बताया कि जब आडवाणी पार्टी का नेतृत्व करते थे तब दो चीज़ों से बचने के लिए कहते थे, जो थीं- छपास और दिखास. पीएम ने बड़बोलेपन को दूर रखने की राय भी दी और सावधान किया कि- मैं सबके लिए कह रहा हूं कि हम सब इन चीज़ों से बचें. कई लोग तो आज भी हंटिंग कर रहे होंगे कि नए आए हैं तो इनसे कुछ पूछें. इस मोह से बचकर चलें तो बहुत कुछ बचाकर चल सकते हैं. आज भी कई लोग पूछेंगे और शुरू में अच्छे सवाल पूछेंगे.

ज़ाहिर है प्रधानमंत्री नए और पुराने दोनों सासंदों को मीडिया से बात करने की टिप्स दे रहे थे ताकि कोई भी अतिउत्साह में ऐसी कोई बात ना कहें जो विवाद खड़ा कर दे.