“न नादेन बिना गीतं, न नादेन बिना स्वर”, पीएम मोदी ने कहां और क्‍यों कही ये बात

PM मोदी ने कहा कि संगीत या योग के माध्यम से जब हम अपनी आत्मशक्ति तक पहुंचते हैं तो ये नाद ब्रह्मनाद हो जाता है. यही कारण है कि संगीत और योग दोनों में ही मेडिटेशन और मोटिवेशन की शक्ति होती है.

PM Narendra Modi, “न नादेन बिना गीतं, न नादेन बिना स्वर”, पीएम मोदी ने कहां और क्‍यों कही ये बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SPIC-MACAY के इंटरनेशनल प्रोग्राम अनुभव सीरीज में वीडियो मैसेज के जरिए बात की. उन्होंने कहा, मुझे करीब तीन साल पहले भी SPIC-MACAY के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करने का अवसर मिला था. तब मैंने आपसे वीडियो लिंक के माध्यम से बात की थी. आज भी ऐसा संयोग है कि आप सभी मुझसे वीडियो माध्यम से ही जुड़े हैं.

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पीएम ने कहा कि हमारे गायकों, गीतकारों, कलाकारों ने देश का मनोबल बढ़ाने के लिए, देश को जागरूक करने के लिए, इस लड़ाई में जोश फूंकने के लिए एक रचनात्मक अभियान खड़ा कर दिया है. बीते दिनों ऐसे कितने ही संगीतमय प्रयोग हमने देखे और सुने हैं. जिस तरह संगीत में एक सामंजस्य की जरूरत होती है, एक अनुशासन की जरूरत होती है, उसी तरह के सामंजस्य, संयम और अनुशासन से ही देश का प्रत्येक नागरिक आज इस महामारी से लड़ रहा है.

प्रधानमंत्री ने कहा, पूरी दुनिया में CORONA बीमारी के कारण जो तनाव है, लोगों में जो डर और दुविधा है, उसे संगीत और कला के माध्यम से कैसे दूर किया जाए, यही आपने इस साल के कार्यक्रम कीथीम भी रखी है. वैसे आपको याद होगा, इस अभियान की शुरुआत 130 करोड़ भारतवासियों ने ताली-थाली बजाकर, शंख-घंटी बजाकर खुद की थी, पूरे देश को एक ऊर्जा से भर दिया था. ऐसे में जब 130 करोड़ लोग एक भावना से साथ आते हैं, एक संग जुड़ते हैं, तो ये संग ही संगीत बन जाता है.

SPIC-MACAY के प्रोग्राम में प्रधानमंत्री ने कही ये बातें

  • कोई भी आपदा पड़ी हो, विपदा-विपत्ति रही हो, हर स्थिति में उत्सवों ने मानव सभ्यता को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने में मदद की है. हमारे देश में तो हर मौसम के लिए, हर ऋतु के लिए अलग-अलग उत्सव, अलग अलग गीत, संगीत और लोकगीत रहे हैं.
  • संगीत या योग के माध्यम से जब हम अपनी आत्मशक्ति तक पहुंचते हैं तो ये नाद ब्रह्मनाद हो जाता है. यही कारण है कि संगीत और योग दोनों में ही मेडिटेशन और मोटिवेशन की शक्ति होती है, दोनों ही ऊर्जा के अपार स्रोत होते हैं.
  • हमारे शास्त्रों में तो कहा गया है-
    न नादेन बिना गीतं, न नादेन बिना स्वरः.
    न नादेन बिना ज्ञानम् न नादेन बिना शिवः
    यानी, नाद के बिना गीत संगीत और स्वर सिद्ध नहीं होते, और नादयोग के बिना ज्ञान और शिवत्व की प्राप्ति नहीं होती.
  • शिवत्व का मतलब है आत्म कल्याण.
    शिवत्व का मतलब है मानवता का कल्याण.
    शिवत्व का मतलब है मानवता की सेवा.
    इसलिए, हमारे यहां संगीत केवल अपने सुख का ही नहीं, बल्कि साधना और सेवा का भी माध्यम रहा है, संगीत की साधना, तपस्या का रूप रही है.
  • राज्यों और भाषाओं की सीमाओं से ऊपर उठकर आज संगीत ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के आदर्श को भी पहले से ज्यादा सशक्त कर रहा है.
  • आप देखिए, आज बंगाल में बैठा व्यक्ति इंटरनेट पर पंजाबी गाने सीख रहा है, पंजाब का युवा दक्षिण भारतीय संगीत सीख रहा है.
  • लोग जो सीख रहे हैं उससे 130 करोड़ देशवासियों को जोड़ भी रहे हैं. लोग सोशल मीडिया पर अपनी रचनात्मकता से नए-नए संदेश भी पहुंचा रहे हैं, कोरोना के खिलाफ देश के अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं.

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