New Education Policy पर PM मोदी ने कहा, आत्मनिर्भर भारत के लिए शिक्षा का अहम योगदान

नई शिक्षा नीति (New Education Policy) के तहत स्कूली छात्रों को चार अलग-अलग वर्गों (Class) में बांटा गया है. पहले वर्ग में 3 से 6 साल की उम्र के छात्र होंगे, जिन्हें प्री-प्राइमरी या प्ले स्कूल से लेकर कक्षा 2 तक की शिक्षा (Education) दी जाएगी.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) पर अपने संबोधन में देश की नई शिक्षा नीति का जिक्र किया. उन्होंने खुशहाल भारत, आत्मनिर्भर और आधुनिक भारत (Self-Reliant and Modern India) के निर्माण में शिक्षा के योगदान को महत्वपूर्ण बताया. प्रधानमंत्री ने कहा, “आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में, आधुनिक भारत के निर्माण में, नए भारत के निर्माण में, समृद्ध और खुशहाल भारत के निर्माण में, देश की शिक्षा का बहुत बड़ा महत्व है. इसी सोच के साथ देश को एक नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति मिली है.”

इस पर क्या कहा केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने

IANS के मुताबिक प्रधानमंत्री के 15 अगस्त के संबोधन में नई शिक्षा नीति (New Education Policy) का जिक्र किए जाने पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ (Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’) ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, हम आपकी आशाओं के अनुसार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए आत्मनिर्भर भारत और नए भारत के निर्माण के लिए संकल्पित हैं.”

फीडबैक और सुझावों के आधार पर किया गया तैयार

नई शिक्षा नीति 29 जुलाई को जारी की गई है. केंद्रीय कैबिनेट ने देश की नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी है. इससे पहले शिक्षा नीति साल 1986 में तैयार की गई थी और 1992 में इसमें संशोधन किया गया था. डॉ. के. कस्तूरीरंगन (K Kasturirangan) की अध्यक्षता में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार करने के लिए गठित समिति के तैयार किए गए NEP 2019 और उस पर हित रखने वालों के मिले फीडबैक और सुझावों के आधार पर इसे तैयार किया गया है.

33 टॉपिक्स पर लिए गए सुझाव और परामर्श

नई शिक्षा नीति के लिए परामर्श प्रक्रिया जनवरी, 2015 में शुरू की गई थी. 33 चिन्हित किए गए विषयों पर बहुआयामी परामर्श प्रक्रिया (Multi-Faceted Consultation Process) में ग्राम स्तर से राज्य स्तर तक जमीनी स्तर पर सुझाव लिए गए. लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6600 ब्लॉक, 6000 शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies), 676 जिलों और 36 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों में एक व्यापक, समयबद्ध, भागीदारी, बॉटम-अप परामर्श प्रक्रिया की गई.

स्कूली छात्रों को बांटा गया 4 अलग-अलग क्लासेस में

नई शिक्षा नीति तैयार करने के लिए 31 अक्टूबर, 2015 को सरकार ने भारत सरकार के पूर्व मंत्रिमंडल सचिव TSR सुब्रहमण्यन (TSR Subramanian) की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समिति गठित की, जिसने अपनी रिपोर्ट 27 मई, 2016 को पेश की थी.

नई शिक्षा नीति के तहत स्कूली छात्रों को चार अलग-अलग वर्गों में बांटा गया है. पहले वर्ग में 3 से 6 साल की उम्र के छात्र होंगे, जिन्हें प्री-प्राइमरी या प्ले स्कूल से लेकर कक्षा 2 तक की शिक्षा दी जाएगी. इसके बाद कक्षा 2 से 5 तक के कोर्स तैयार किए जाएंगे. उसके बाद कक्षा 5 से 8 और फिर अंत में 4 सालों के लिए 9 से लेकर 12वीं तक के छात्रों को ध्यान में रखते हुए एजुकेशनल प्रोग्राम बनाया गया है. (IANS)

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