कौम, जातियों, पंथों में एकता की ज़रूरत बताते हुए PM मोदी को क्यों याद आया 1857 का स्वतंत्रता संग्राम?

पीएम मोदी ने कहा कि 1857 का स्वतंत्रता संग्राम इस देश की हर कौम, जाति, पंथ ने कंधे से कंधा मिलाकर लड़ा था.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को विपक्षी दलों पर चुनावी लाभ के लिए अल्पसंख्यकों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा और सहयोगी दलों को अल्पसंख्यकों के मन से डर दूर करना चाहिए क्योंकि देश की समृद्धि के लिए सबको साथ लेकर चलने की जरूरत है.

पीएम मोदी ने कहा, “1857 का स्वतंत्रता संग्राम इस देश की हर कौम, जाति, पंथ ने कंधे से कंधा मिलाकर लड़ा था. देश की एकता और अखंडता के लिए संविधान की शपथ लेने वालों का दायित्व है कि उस आजादी की भावना को जिंदा करें. सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास ही हमारा मंत्र है.”

टीवी9 भारतवर्ष के ‘राष्ट्रीय बहस’ कार्यक्रम में शनिवार को वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम ने इस पर अन्य पत्रकारों के साथ चर्चा की. वरिष्ठ पत्रकार शीतल सिंह ने कहा कि पीएम मोदी ने 1857 की जिस धारा का जिक्र किया वो आरएसएस की धारा से बिलकुल अलग है. आरएसएस के कई प्रचारक हिंदू-मुस्लिम में घृणा की बात करते रहे हैं. लेकिन 1897 में बहादुर शाह जफर को सबने बादशाह माना था. कई सारे हिंदू राजा जफर को अपना नेतृत्व करने के लिए मना रहे थे.

पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौरान कहा कि चुनाव उनके लिए एक तीर्थ यात्रा की तरह था. इस पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक वानखेड़े ने कहा कि मोदी बात बहुत अच्छी करते हैं. उनकी बात सीधे दिल में उतरती है. पीएम मोदी ने 2014 की तुलना में इस बार और अच्छा भाषण दिया है. लेकिन ये जरूरी है कि पीएम मोदी की बातें हकीकत में भी सही साबित हों.

वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव का कहना था कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए की हमारा देश कितना बड़ा है. ऊपर से कही गई बात को नीचे तक पहुंचने में काफी समय लगता है. इसलिए ऐसी अपेक्षा करना ठीक नहीं है कि पीएम मोदी की बात पर हर कोई अमल करेगा.

वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्ता का कहना था कि यह जरूरी है कि पीएम मोदी जो बात कह रहे हों उस पर अमल भी किया जाए. प्रधानमंत्री के स्तर से कही गई बात की पालन जरूर किया जाना चाहिए. इस पर राहुल देव ने कहा कि महात्मा गांधी के अपने ही समर्थक कई बार उनके निर्देश का उल्लंघन किया करते थे. गांधी को चौरी-चौरा कांड के बाद असहयोग आंदोलन वापस लेना पड़ा था.