महाबलीपुरम में PM मोदी ने समुद्र के किनारे लिखी कविता, कहा- सागर से संवाद करने में खो गया

पीएम मोदी ने लिखा, "कल महाबलीपुरम में सवेरे तट पर टहलते-टहलते सागर से संवाद करने में खो गया. ये संवाद मेरा भाव-विश्व है."
Narendra Modi, महाबलीपुरम में PM मोदी ने समुद्र के किनारे लिखी कविता, कहा- सागर से संवाद करने में खो गया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से तमिलनाडु के प्राचीन शहर महाबलीपुरम में दूसरी अनौपचारिक मुलाकात की थी. पीएम मोदी ने इस दौरान चीन के राष्ट्रपति के साथ न केवल लंबी बातचीत की बल्कि इस ऐतिहासिक जगह से उन्हें परिचित भी कराया.

इसके साथ ही पीएम मोदी ने समुद्र किनारे बैठकर एक कविता लिखी. उन्होंने यह कविता ट्वीटर पर शेयर की है. पीएम मोदी ने लिखा, “कल महाबलीपुरम में सवेरे तट पर टहलते-टहलते सागर से संवाद करने में खो गया. ये संवाद मेरा भाव-विश्व है.”


पीएम मोदी की कविता इस तरह है…

हे… सागर!!!

तुम्हें मेरा प्रणाम!

तू धीर है, गंभीर है,

जग को जीवन देता, नीला है नीर तेरा।

ये अथाह विस्तार, ये विशालता,

तेरा ये रूप निराला।

हे… सागर!!!

तुम्हें मेरा प्रणाम!

लोगों को पसंद आई PM मोदी की कविता
पीएम मोदी की इस कविता को लोग खूब पसंद कर रहे हैं. सोशल मीडिया यूजर्स ने इस कविता का काफी तारीफ की है. इस साथ ही लोग शनिवार सुबह महाबलीपुरम बीच पर प्लॉगिंग करने की उनकी तस्वीरें शेयर कर रहे हैं. भारी संख्या में लोग महाबलीपुरम जा रहे हैं.

मालूम हो कि पीएम मोदी ने इससे पहले भी कुछ कविताएं लिखी हैं. साल 2007 में ‘आंख आ धन्य छे’ नाम से गुजराती के संकलन उनकी कुल 67 कविताएं छपीं थीं. सात साल बाद वे हिंदी में आईं. अंजना संधीर ने इनका अनुवाद किया और ‘आंख ये धन्य है’ नाम से यह छपीं. जो काफी पसंद की गईं.

आतंकवाद सहित कई मुद्दों पर हुई चर्चा
गौरतलब है कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच अनौपचारिक शिखर वार्ता दो दिन तक चली. दोनों नेताओं ने शनिवार को आतंकवाद सहित कई द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की.

पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग इस दौरान दोनों देशों के बीच बने मतभेदों को विवेकपूर्ण ढंग से सुलझाने, एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशील रहने और उन्हें विवाद का रूप नहीं देने पर सहमत हुए.

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