CBSE के सिलेबस घटाने पर बढ़ा सियासी रार, पढ़ें- क्या है पूरा मामला, किसने क्या कहा

फिलहाल सिलेबस (Syllabus) में कटौती का फायदा सिर्फ क्लास 9 से 12 तक के स्कूली छात्रों को ही मिलेगा. 2021 की वार्षिक परीक्षा के बाद 9वीं और 11वीं के स्टूडेंट्स को पूरा सिलेबस 10वीं और 12वीं में पढ़ना होगा.
Political rage on reducing CBSE syllabus, CBSE के सिलेबस घटाने पर बढ़ा सियासी रार, पढ़ें- क्या है पूरा मामला, किसने क्या कहा

कोरोनावायरस (Coronavirus) महामारी (Pandemic) के कारण देश में पैदा हुए हालात के मद्देनजर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने क्लास 9 से 12 तक के सिलेबस में कटौती की है. मूल अवधारणाओं को बनाए रखते हुए सिलबेस को 30 फीसदी तक कम कर दिया गया है. सरकार के इस कदम को लेकर विपक्ष हमलावर हो गया है. कांग्रेस, टीएमसी, एनसीपी, बीएसपी, सीपीएम और आम आदमी पार्टी ने सिलेबस कम किए जाने पर एतराज जताया है.

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ममता बनर्जी, टीएमसी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीबीएसई के इस कदम पर हैरानी जताई. उन्होंने ट्वीट किया, “इस बात को जानकर हैरानी हुई है कि केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान सीबीएसई कोर्स कम करने के लिए नागरिकता, संघीयता, धर्मनिरपेक्षता और विभाजन को हटा दिया है. हम कड़ाई से इसका विरोध करते हैं और मानव संसाधन विकास मंत्रालय और भारत सरकार से यह अपील करते हैं कि इन महत्वपूर्ण विषयों को किसी भी कीमत पर नहीं हटाया जाना चाहिए.”

शशि थरूर, कांग्रेस

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्विटर पर लिखा कि अब दसवीं क्लास के बच्चे लोकतंत्र, लोकतंत्र को मिलने वाली चुनौती, धर्म, जाति जैसे सब्जेक्ट नहीं पढ़ पाएंगे. इसके अलावा 11-12वीं के बच्चे जो वोटर बनने की कगार पर हैं, उन्हें राष्ट्रवाद-सेक्युलरिज्म, बंटवारे और पड़ोसियों के साथ संबंध का पाठ नहीं पढ़ाया जाएगा. जिन्होंने ये बदलाव किए हैं उनकी मंशा पर सवाल खड़े होते हैं. क्या उन्होंने ये तय कर लिया है कि लोकतंत्र, सेक्युलरिज्म जैसे मुद्दे भविष्य के नागरिकों के लिए जरूरी नहीं हैं? उन्होंने सरकार से फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की.

मनीष सिसोदिया, आप

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को कहा कि सीबीएसई को स्कूल पाठ्यक्रम में से कुछ अध्यायों को हटाने का औचित्य बताना चाहिए और बोर्ड के पास इस कदम के लिए ‘बहुत मजबूत’ कारण होना चाहिए. उन्होंने कहा कि 2020-21 के शैक्षणिक सत्र में माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम को कम करने के सीबीएसई के फैसले का समर्थन करता हूं. मगर जिस तरह से कटौती की गई है, उसे लेकर मेरी आशंकाएं और चिंताएं हैं.

बीएसपी-एनसीपी

बीएसपी सांसद कुंवर दानिश अली ने एचआरडी मिनिस्ट्री पर निशाना साधते हुए कहा कि मंत्रालय ‘वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी’ के अध्यायों के आधार पर शिक्षा चाहता है. एनसीपी प्रवक्ता महेश तपासे ने कहा कि बीजेपी भविष्य में फिर से इतिहास भी लिख सकती है. तपासे ने कहा, ‘बीजेपी सरकार ने धर्मनिरपेक्ष, राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, विविधता आदि से जुड़े अध्यायों को सीबीएसई के पाठ्यक्रम से हटा दिया.’

सीतीराम येचुरी, सीपीएम

लेफ्ट ने आरोप लगाया कि सरकार अपने अजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए कोरोना महामारी को बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर रही है. सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने ट्वीट किया, ‘मोदी सरकार महामारी के बहाने भारत की बहुलता, विविधता, लोकतंत्र जैसे भाग उच्च माध्यमिक पाठ्यक्रम से हटा रही है.’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘यह सब आरएसएस के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना है. यह हमारे संविधान को नष्ट करने की तरह है. यह अस्वीकार्य है.’

सिलेबस में क्या-क्या हटाया गया

सिलेबस में कटौती के बाद अब धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद जैसे कई अध्यायों को मौजूदा शैक्षणिक वर्ष के लिए से हटा दिया गया है. क्लास 9 के सिलेबस से कम्प्यूटर से प्रोग्रामिंग लैंग्वेज, सोशल साइंस से लोकतांत्रिक अधिकार और हिंदी से बच्चन, महादेवी और दिनकर की रचनाएं हटीं. मैथेमैटिक्स के सिलेबस से 5 यूनिट से 15 टॉपिक कम कर दिए गए हैं.

कक्षा 10 में हिंदी बी के सिलेबस से व्याकरण, पद्य खंड और गद्य खंड मिलाकर कुल 9 पाठ हटाए गए. इनमें रवींद्र नाथ टैगोर की रचना आत्मत्राण भी शामिल है. इंग्लिश में ग्रामर से चार और लिटरेचर से पांच टॉपिक हटाए गए हैं. ग्रामर में नाउन, एडवर्ब क्लॉजेस, प्रिपोजिशन, फर्स्ट फ्लाइट टॉपिक नहीं पढ़ने होंगे. साइंस से मेटल, कार्बन और इलेक्ट्रिक करंट वाले टॉपिक हटाए गए. मैथ्स से ज्योमेट्री और अलजेब्रा से जुड़े टॉपिक भी कम हुए.

सीबीएसई की इस कटौती का असर 11वीं कक्षा में पढ़ाए जाने जाने वाले संघीय ढांचा, राज्य सरकार, नागरिकता, राष्ट्रवाद और धर्मनिरपेक्षता जैसे अध्याय पर दिखेगा. 12वीं के छात्रों को अब इस मौजूदा वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था का बदलता स्वरूप, नीति आयोग, जीएसटी जैसे विषय नहीं पढ़ाए जाएंगे.

सीबीएसई ने नियमों में क्या जोड़ा

इन सभी अध्यायों को मौजूदा एक वर्ष के लिए सिलेबस से हटा दिया है. घटाया गया सिलेबस बोर्ड परीक्षाओं और आतंरिक मूल्यांकन के लिए निर्धारित विषयों का हिस्सा नहीं होगा. फिलहाल सिलेबस में कटौती का फायदा सिर्फ क्लास 9 से 12 तक के स्कूली छात्रों को ही मिलेगा. 2021 की वार्षिक परीक्षा के बाद 9वीं और 11वीं के स्टूडेंट्स को पूरा सिलेबस 10वीं और 12वीं में पढ़ना होगा. स्कूल के हेड और टीचर विभिन्न विषय संयोजित करने के लिए स्टूडेंट्स को घटाई गई विषय-वस्तु के बारे में बताना भी सुनिश्चित करेंगे. संशोधित सिलेबस सीबीएसई की शैक्षणिक वेबसाइट पर उपलब्ध होगा.

सीबीएसई ने मामले पर क्या कहा

राजनीतिक विवाद के तूल पकड़ने पर सीबीएसई ने कहा कि बाहर जो विषय गलत तरीके से बताए गए हैं, उसे हटा दिया गया है, लेकिन ये एनसीईआरटी के वैकल्पिक शैक्षणिक कैलेंडर के तहत कवर किए गए हैं जो बोर्ड के सभी संबद्ध स्कूलों के लिए पहले से ही लागू है. सीबीएसई के सचिव अनुराग त्रिपाठी ने कहा कि यह फिर से दोहराया जा रहा है कि हटाए गए विषयों को या तो तर्कसंगत पाठ्यक्रम या एनसीईआरटी के वैकल्पिक शैक्षणिक कैलेंडर द्वारा कवर किया जा रहा है.

क्या बोले एचआरडी मिनिस्टर निशंक

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा, “कोरोना के कारण उत्पन्न हुए मौजूदा हालात को देखते हुए सीबीएसई के सिलेबस में कक्षा 9 से 12 तक 30 प्रतिशत कटौती करने का निर्णय लिया गया है. सीबीएसई के सिलेबस में यह कटौती के केवल इसी वर्ष 2020-21 के लिए मान्य होगी.” उन्होंने कहा, “कोरोना महामारी के मद्देनजर पूरे देश के शिक्षाविदों से सिलेबस में कटौती के विषय पर मैंने ठोस सुझाव आमंत्रित किए थे. मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि इस विषय पर देश भर के 1500 से अधिक शिक्षाविदों ने अपने सुझाव भेजे हैं.”

अगस्त तक स्कूलों के खुलने की संभावना कम

दरअसल, कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष स्कूलों के कार्य दिवस काफी कम हो गए हैं. अगस्त माह तक स्कूल खुलने की संभावना बेहद कम है. अधिकांश छात्रों को ऑनलाइन माध्यमों से ही शिक्षा दी जा रही है. ऐसे में अब स्वयं छात्र, अभिभावक और शिक्षक भी छात्रों के पाठ्यक्रम को कम किए जाने किए जाने की बात कह रहे थे.

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