1984 के दंगाइयों पर कांग्रेस ने नहीं लिया एक्शन, ढींगरा कमेटी की रिपोर्ट पर बोले प्रकाश जावेड़कर

प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "दिल्ली में तीन दिन में 3000 सिख जिंदा जलाए गए. राजीव गांधी ने समर्थन किया था कि बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है."

बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ढींगरा कमीशन की रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है. जावड़ेकर ने कहा कि ढींगरा कमीशन की रिपोर्ट में ये साफ हो गया है कि कांग्रेस ने 1984 के दंगाइयों पर करवाई नहीं की. मालूम हो कि 1984 में सिख विरोधी दंगा मामले में जस्टिस ढींगरा कमीशन ने सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अपनी रिपोर्ट दाखिल की.

जावड़ेकर ने आरोप लगाया कि ‘इस नरसंघार की सही जांच नहीं हुई. दिल्ली में 3 दिन में 3000 सिख जिंदा जलाए गए. राजीव गांधी ने समर्थन किया था कि बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है.’

उन्होंने कहा, “जस्टिस ढींगरा ने रिपोर्ट में कहा कि सुल्तानपुरी में 500 घटनाएं हुईं और इन सभी का एक ही एफआईआर किया गया. जबकि हर गुनाह का अलग अलग एफआईआर होता है और इसके लिए एक ऑफिसर को जांच का काम दिया गया. लिहाजा देरी हुई, जांच पूरी नहीं हुई और कोर्ट ने बोला कि समय से जांच नहीं हुई. सभी आरोपी बरी कर दिए गए.”

बीजेपी नेता ने कहा कि ‘दिल्ली सरकार की लापरवाही से निर्भया के गुनाहगारों को सजा नहीं मिली. इन्होंने फिर कहा कि 22 जनवरी को फांसी नहीं लग सकती. देश चाहता है कि उसको फांसी लगे .अब दिल्ली सरकार का वकील कह रहा है कि 22 जनवरी को फांसी नहीं लग सकती.’

उन्होंने कहा, “सरकार ने मामले को 2 साल से ज्यादा वक्त तक लटकाकर रखा. दिल्ली सरकार के व्यवहार से जनता नाराज है. लोग पूछ रहे हैं कि दिल्ली सरकार ने क्यों नोटिस नहीं दिया कि इनको फांसी पर लटकाना है. हमारी सरकार ने कोर्ट में कहा है कि ढींगरा कमिटी की रिपोर्ट स्वीकार की है और आगे करवाई करेंगे.”

जावड़ेकर ने कहा कि ‘आज दिल्ली सरकार को याद आई कि फांसी के लिए 14 दिन का समय देना है. लेकिन आपने 14 दिन के नोटिस पीरियड को क्यों नहीं माना, उसकी वजह से देर हो गई. अभी तक निर्भया के दोषी फांसी पर नहीं लटके, इसके लिए दिल्ली सरकार दोषी है.’

वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने प्रकाश जावड़ेकर के बयान पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी को केवल चुनाव के समय ही 84 के दंगे याद आते हैं.

कांग्रेस नेता ने कहा, “हमारे नेता डॉ. मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी पहले ही 84 के दंगों पर खेद जाहिर कर चुके हैं. लेकिन बीजेपी और आरएसएस का क्या, जिनके 30 सदस्यों के नाम एफआईआर में दर्ज हुए थे. उन्होंने तब से लेकर अब तक माफी नहीं मांगी है.”

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