अवमानना मामले में बड़ी पीठ करे सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण ने लगाई याचिका

याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को मूल आपराधिक अवमानना मामलों में सजा के खिलाफ अंतर-अदालत में अपील के लिए नियम और दिशा-निर्देश जारी करना चाहिए.

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में शनिवार को एक याचिका दायर करते हुए मांग की कि आपराधिक अवमानना मामलों में सजा के खिलाफ उन्हें अपील का अधिकार मिले. साथ ही इस मामले की सुनवाई एक बड़ी और अलग पीठ करे. यह याचिका उनकी वकील कामिनी जायसवाल के माध्यम से याचिका दायर की गई है. भूषण ने शीर्ष अदालत से निर्देश जारी करने का आग्रह किया है कि याचिकाकर्ता सहित आपराधिक अवमानना के लिए दोषी पाए गए व्यक्ति को एक बड़ी और अलग पीठ द्वारा सुनवाई के लिए अंतर-अदालत में अपील का अधिकार होना चाहिए.

याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत को मूल आपराधिक अवमानना मामलों में सजा के खिलाफ अंतर-अदालत में अपील के लिए नियम और दिशा-निर्देश जारी करना चाहिए.

‘मौलिक अधिकार है अपील का अधिकार’

इस याचिका में कहा गया है कि अपील का अधिकार संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है और अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत इसकी गारंटी भी है.

शीर्ष अदालत ने 31 अगस्त को भूषण को न्यायपालिका के खिलाफ दो ट्वीट करने के लिए दोषी ठहराया था और उन पर एक रुपये का जुर्माना लगाया था.

कोर्ट ने क्या सुनाया था फैसला

फैसले के अनुसार, 15 सितंबर तक जुर्माना नहीं दिए जाने की स्थिति में भूषण को तीन महीने की जेल हो सकती है और तीन साल के लिए उन्हें वकालत से निलंबित भी किया जा सकता है.

भूषण ने यह कहते हुए पीछे हटने या माफी मांगने से इनकार कर दिया था कि यह उनकी अंतरात्मा और न्यायालय की अवमानना होगी.

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