Contempt of Courts Act को प्रशांत भूषण ने दी चुनौती, Supreme Court में दाखिल की याचिका

याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के सम्मान को गिराने वाले बयान पर लगने वाली ये धारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन है.
advocate Prashant Bhushan, Contempt of Courts Act को प्रशांत भूषण ने दी चुनौती, Supreme Court में दाखिल की याचिका

वकील प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दाखिल कर अदालत की अवमानना कानून की धारा 2(c)(i) को चुनौती दी है. वरिष्ठ पत्रकार एन राम (N Ram) और अरुण शौरी (Arun Shourie) भी याचिकाकर्ता बने हैं.

याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के सम्मान को गिराने वाले बयान पर लगने वाली ये धारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन है.

अवमानना ​​अधिनियम के कुछ प्रावधानों को रद्द करने की मांग

याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट अदालत की अवमानना ​​अधिनियम 1971 के कुछ प्रावधानों को रद्द कर दे. याचिका में तर्क दिया गया है कि लागू उप-धारा असंवैधानिक है, क्योंकि यह संविधान के प्रस्तावना मूल्यों और बुनियादी विशेषताओं के साथ असंगत है.

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दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना ​​कार्यवाही शुरू की है. इस मामले को 4 अगस्त को सुनवाई होने वाली है. वहीं, कई पूर्व जजों ने कोर्ट के कदम का विरोध किया है. इनका कहना है कि कोर्ट भूषण के खिलाफ अवमानना ​​कार्यवाही छोड़ दे.

131 शख्सियतों ने सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार

कुल 131 शख्सियतों ने कोर्ट से अदालत की अवमानना की कार्यवाही पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया. इनमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी लोकुर और स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव शामिल हैं. दिल्ली के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ए.पी.शाह, पटना हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अंजना प्रकाश, इतिहासकार रामचंद्र गुहा, लेखिका अरुंधति रॉय, सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर और वकील इंदिरा जयसिंग सहित कई अन्य लोग भी इसमें शामिल हैं.

हस्तियों ने कहा है कि न्याय, निष्पक्षता के साथ अदालत की गरिमा को बरकरार रखने के लिए हम शीर्ष सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश करते हैं कि वह प्रशांत भूषण के खिलफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के अपने फैसले पर पुनर्व‍िचार करे.

बता दें कि कोर्ट ने प्रशांत भूषण के दो ट्वीट पर स्वत: संज्ञान लिया है. कोर्ट ने उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करते हुए नोटिस जारी कर दी है. कोर्ट ने कहा कि उनके बयानों से प्रथमदृष्टया न्याय के प्रशासन की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है.

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