1954 के बाद पहली बार प्री-मानसून में सबसे कम बारिश, सूखे की आशंका

केरल में 6 जून को मॉनसून के दस्तक देने का अनुमान है और अब तक महज 99 मिलीमीटर बारिश ही हुई है.
मानसून में देरी, 1954 के बाद पहली बार प्री-मानसून में सबसे कम बारिश, सूखे की आशंका

नई दिल्ली: भयंकर धूप और औसत से कम बारिश ने अन्नदाताओं के माथे में चिंता की लकीरें खींच दी है. इस वर्ष मध्य महाराष्ट्र,मराठवाड़ा और महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में औसत से कम बारिश हुई है. इसके अलावा कोंकण-गोवा, गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ इलाके में भी यही स्थिति देखने को मिली है.

केरल में 6 जून को मॉनसून के दस्तक देने का अनुमान है और अब तक महज 99 मिलीमीटर बारिश ही हुई है. भारतीय मौसम विभाग के डेटा के मुताबिक बीते 65 सालों में यह दूसरा मौका है, जब इस तरह से प्री-मॉनसून सूखे की स्थिति पैदा हुई है.

1954 के बाद से ऐसा दूसरी बार हुआ है, जब प्री-मॉनसून में इतनी कम वर्षा हुई हो. तब देश में 93.9 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई थी. इसके बाद 2009 में मार्च, अप्रैल और मई के दौरान 99 मिलीमीटर बारिश हुई थी. फिर 2012 में यह आंकड़ा 90.5 मिलीमीटर का था और इसके बाद अब 2019 में 99 मिलीमीटर बारिश हुई है.

औसत से सबसे कम बारिश मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और महाराष्ट्र के ही विदर्भ इलाके में हुआ है. इसके अलावा कोंकण-गोवा, गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ इलाके में भी यही स्थिति देखने को मिली है. तटीय कर्नाटक, तमिलनाडु और पुदुचेरी जैसे इलाकों में भी प्री-मॉनसून बारिश की कमी रही.  पहाड़ी राज्य जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम उत्तर प्रदेश, उत्तर कर्नाटक, तेलंगाना और रायलसीमा में भी कम ही बारिश हुई है. हालांकि महाराष्ट्र से सभी राज्यों का औसत अच्छा रहा है.

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