गांव तक नहीं पहुंची एंबुलेंस, गर्भवती को चारपाई पर लादकर 15 किमी पैदल चले परिजन

प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती को पेट में शिशु उल्टा मुड़ जाने की वजह से जल्दी अस्पताल पहुंचाना था, लेकिन खराब सड़क की वजह से एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी.
pregnant woman, गांव तक नहीं पहुंची एंबुलेंस, गर्भवती को चारपाई पर लादकर 15 किमी पैदल चले परिजन

विशाखापट्टनम: सरकार भले ही गांवों को सड़कों के जरिए शहरों से जोड़ने के कितने ही दावे कर ले, लेकिन आज भी कई ऐसे गांव हैं जहां सड़क ना होने के चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले के एक गांव से एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहां गांव में सड़क कनेक्टिविटी और एंबुलेंस ना होने के कारण परिजनों को एक गर्भवती महिला को डिलीवरी के लिए चारपाई पर ढोकर 15 किमी पैदल पैदल चलना पड़ा.

pregnant woman, गांव तक नहीं पहुंची एंबुलेंस, गर्भवती को चारपाई पर लादकर 15 किमी पैदल चले परिजन

आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम जिले के वी माडुगुला मंडल के आदिवासी इलाके में स्थित कोत्तावलसा गांव ऐसा है,  जहां बारिश की वजह से नजदीकी अस्पताल के जी पुरम जाने का कच्चा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो चुका है.

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इसके चलते रविवार को प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती जानापारेड्डी देवी (करीब 25 वर्ष) जिसको पेट में शिशु उल्टा मुड़ जाने की वजह से जल्दी अस्पताल पहुंचाना था, लेकिन खराब सड़क की वजह से उनको लेने एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी. आदिवासी इलाका होने की वजह से वहां आने-जाने की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है. यहां तक आने के लिए कोई सड़क नहीं बनी है और बारिश की वजह से कच्चे रास्ते भी कीचड़ में तब्दील हो चुके थे.

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महिला को अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों ने उसे चारपाई में लिटाया उसके बाद एक बांस की डलिया बांधी, फिर उसे कंधों पर ढोकर 15 किमी पैदल चले. रास्ते में गर्भवती महिला की प्रसव पीड़ा बढ़ गई थी, किसी तरह से उसे जी पुरम के अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल में महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया है. महिला और बच्ची दोनों सुरक्षित हैं.

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