24 घंटों के लिए Coronavirus पर सीधा वार, ‘जनता कर्फ्यू’ के लिए तैयार

जनता कर्फ्यू (Janta Curfew) के लिए मंत्रालय से लेकर स्वैच्छिक स्वास्थ्य संगठनों (Health Organisation) ने तैयारी शुरू कर दी है. संगठन से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं को जनता कर्फ्यू के बारे में जानकारी लोगों तक पहुंचाने को तत्काल कहा है.
Coronavirus Preparation for Janta curfew, 24 घंटों के लिए Coronavirus पर सीधा वार, ‘जनता कर्फ्यू’ के लिए तैयार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने जनता से इस बात की गुजारिश की है कि रविवार के दिन जनता खुद तय करे कि वह घर से नहीं निकलेंगे. इसे उन्होंने जनता कर्फ्यू (Janta Curfew) का नाम दिया. इस जनता कर्फ्यू के लिए मंत्रालय से लेकर स्वैच्छिक स्वास्थ्य संगठनों ने तैयारी शुरू कर दी है.

भारतीय स्वैच्छिक स्वास्थ्य संघ के सीनियर प्रोग्राम क्रॉडिनेटर डॉ. पीसी भटनागर ने टीवी 9 भारतवर्ष से खास बातचीत में कहा कि हमने अपने संगठन से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं को जनता कर्फ्यू (Janta Curfew) के बारे में जानकारी लोगों तक पहुंचाने को तत्काल कहा है. उन्होंने कहा कि देश में सबसे पहले गुजरात में प्लेग के दौरान जनता कर्फ्यू का इस्तेमाल किया गया था.

24 घंटे सीधा वार

डॉ. भटनागर ने कहा कि चूंकी कोरोना (Coronavirus) स्टेज 3 में पहुंच रहा है. ऐसे में इसे रोकना काफी जरूरी है. इसे ध्यान में रखते हए जनता कर्फ्यू के माध्यम से हम 24 घंटा कोरोना को फैलने से रोक सकते हैं. उन्होंने कहा कि हालांकि प्रधानमंत्री ने सुबह 7 बजे से रात 9 बजे का ही समय मांगा है, लेकिन उस दिन रविवार है तो ऐसे में यह माना जा सकता है कि पूरे दिन लोग घरों से नहीं निकलेंगे, जिसका सीधा असर कोरोना के संक्रमण को रोकने पर पड़ेगा.

ब्रेक होगा कोरोना का साइकिल

कोरोना एक दूसरे के सम्पर्क में आने से ही फैलता है. इसे ध्यान में रखते हुए जनता कर्फ्यू के माध्यम से डॉक्टरों का मानना है कि कोरोना के संक्रमण पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है. तीसरे स्टेज में 24 घंटे का वक्त काफी अहम होता है. यदि जनता कर्फ्यू सफल होता है तो निश्चित रुप से एक बड़ी आबादी कोरोना के संक्रमण से बच पाएगी.

ज्यादा लोगों तक पहुंचे बात

रविवार के जनता कर्फ्यू कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए स्वैच्छिक संगठनों से जुड़े लोग बड़ी तादाद में लोंगों तक यह संदेश पहुंचा रहे हैं कि यह क्यों जरुरी है. इसके साथ ही डॉ. भटनागर ने बताया कि हमने तकनीक की भी सहायता ली है, जिसमें सोशल मीडिया के माध्यम और व्हाट्सएप के ग्रुप बनाकर लोगों को इसके बारे में जानकारी दी जा रहा है.

जब सूरत में लोंगो ने खुद को किया कैद

डॉ. भटनागर ने कहा कि 1994 में गुजरात के सूरत में प्लेग फैला. इस समय बड़ी संख्या में लोगों का सूरत (Surat) शहर से पलायन हुआ. प्लेग की वजह से काफी ज्यादा अफवाह फैली और किसी को पहले यह समझ में नहीं आ रहा कि हो क्या रहा है. इस समय सबसे पहले जनता कर्फ्यू का प्रयोग हुआ और लोगों ने खुद को अपने घरों में कैद किया.

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