राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पूर्व CJI रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए किया नॉमिनेट

राष्ट्रपति ने पूर्व मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) को राज्यसभा (RajyaSabha) के लिए नामित किया है. गोगोई ने अयोध्या राम मंदिर समेत कई महत्वपूर्ण मामलों पर फैसला सुनाया था.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ram Nath Kovind) ने पूर्व मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) को राज्यसभा (Rajyasabha) के लिए नामित किया है. पूर्व सीजेआई ने अयोध्या राम मंदिर (Ram Mandir) समेत कई महत्वपूर्ण मामलों पर फैसला सुनाया था.

गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है, “भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (तीन) के साथ पठित खंड (एक) के उपखंड (क) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति, एक मनोनीत सदस्य की सेवानिवृत्ति के कारण हुई रिक्ति को भरने के लिए रंजन गोगोई को राज्यसभा का सदस्य मनाीनीत करते हैं.”

भारत के 46वें चीफ जस्टिस रहे गोगोई

रंजन गोगोई 3 अक्टूबर 2018 को भारत के 46वें चीफ जस्टिस बने थे. गोगोई का कार्यकाल लगभग 13 महीने का रहा था. वह असम के मुख्यमंत्री रहे केशब चन्द्र गोगोई के बेटे हैं.

गोगोई ने ने 1978 में वकालत शुरू की थी. 2001 में गुवाहाटी हाईकोर्ट के स्थाई जज बने. 2011 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का पदभार संभाला. गोगोई 23 अप्रैल 2012 को सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त हुए. उनकी छवि एक बेहद सख्त और ईमानदार जज की है.

अयोध्या पर सुनाया ऐतिहासिक फैसला

चीफ जस्टिस के तौर पर रंजन गोगोई ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में दशकों से चले आ रहे अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाया था. जस्टिस गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने 9 नवंबर, 2019 को अपने फैसले से राम मंदिर निर्माण का रास्‍ता साफ कर दिया था.

रंजन गोगोई से पहले कुछ और भी पूर्व मुख्य न्यायधीशों को राज्यसभा भेजा जा चुका है. इसमें एम हिदायतुल्ला और रंगनाथ मिश्रा का नाम शामिल है. इसके अलावा पी सदाशिवम को केरल का राज्यपाल बनाया गया था.

12 लोगों को नॉमिनेट कर सकते हैं राष्ट्रपति 

संविधान के अनुच्‍छेद 80 के मुताबिक, राज्‍यसभा के कुल 250 सदस्‍यों में से 12 मेंबर्स को राष्‍ट्रपति नॉमिनेट करते हैं. मतलब राज्‍यसभा के 238 सदस्‍यों का चुनाव राज्‍य और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि चुनते हैं.

राष्‍ट्रपति जिन 12 सदस्‍यों को नॉमिनेट करते हैं, उनके पास साहित्‍य, विज्ञान, आर्ट और सामाजिक कार्यों में विशेष अनुभव होना चाहिए. एक और खास बात यह है कि उपराष्‍ट्रपति राज्‍यसभा के चेयरपर्सन होते हैं. राज्‍यसभा के सदस्‍यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है.

Related Posts