निष्प्राण सुषमा दीदी को यूं देखकर भावुकता के समंदर में डूबे हुए थे प्रधानमंत्री मोदी

आखिरी बार काफिला निकला था सुषमा दीदी का. माहायात्रा पर निकलीं सुषमा को अंतिम बार देखने के लिए सड़क किनारे लोगों की कतार खड़ी थी.

नई दिल्ली: स्तब्ध हैं. नि:शब्द हैं. विस्मित हैं देश के प्रधान, निष्प्राण सुषमा दीदी को यूं देखकर. ठिठके हुए थे प्रधानमंत्री मोदी के होंठ. ठहरी हुई थी आंखें. सुन्न हो गई थी देह. प्रधानमंत्री मोदी की सब्र की दीवार ध्वस्त होने को आतुर थी. समूचा हिंदुस्तान सिसक रहा था यह भावुक दृश्य देखकर.

सियासत के उत्तुंग शिखर पर नैतिकता का ध्वज फहराकर अचानक विदा हुईं सुषमा के लिए प्रधानमंत्री रो रहे थे. गृहमंत्री रो रहे थे. आडवाणी रो रहे थे. रो रहा था सारा जहां. दलीय द्वेष से भरी राजनीति में अजातशत्रु बनकर अनंतकाल में विलुप्त होने वाली सुषमा स्वराज के लिए रो रहा था कायनात का कोना-कोना. हर आंखें नम थी उस शख्सियत को देखकर जो करोड़ों लोगों की आंखों का नूर थी.

लकड़ी और शीशे के डब्बे में खामोश लेटी हुई सुषमा दीदी को यूं आखिरी बार निहार रहे थे प्रधानमंत्री मोदी. उस सुषमा को जो 67 बरस तक फूल की तरह खिलीं रही लोकतंत्र के चमन में. वो फूल जो पांच दशकों तक महकता रहा संसद के अंदर. उस बेजान और मुरझाई हुई फूल पर फूलों की माला अर्पित करते हुए भावुकता के समंदर में डूबे हुए थे प्रधानमंत्री मोदी. याद आ रहा था यूएन की सभा में गूंजने वाले सुषमा के ओजस्वी शब्द. याद आ रहे थे यूएन में जाते वक्त प्रधानमंत्री मोदी के लिए सुषमा दीदी के सलाह भरे वाक्य.

तिरंगे में लिपटी सुषमा को अंतिम बार आंखों के जरिए दिलों में उतारने वालों का तांता लगा था बीजेपी हेडक्वार्टर में. असंख्य भीड़ पहुंची थी उस शख्सित को अंतिम प्रणाम करने के लिए, जो लोकतंत्र का सच्चा और बेदाग वाहक रही ज़िंदगी भर. बत्तीस बरस की संसदीय राजनीति की उपलब्धियों को आंचल में समेटकर सियासत के शीर्ष पर पहुंचने के बाद खुद को चुनावी राजनीति से दूर कर लेने वाली सुषमा याद आ रही थी दुनिया को. उस विराट व्यक्तित्व सुषमा दीदी की हर बात प्रधानमंत्री को याद आ रही थी.

आखिरी बार काफिला निकला था सुषमा दीदी का. माहायात्रा पर निकलीं सुषमा को अंतिम बार देखने के लिए सड़क किनारे लोगों की कतार खड़ी थी. काफिला आगे बढ़ रहा था, लोधी रोड शवदाह गृह में इंतजार हो रहा था. आखिरी इंतजार था ये सुषमा को अपनों के बीच. मौजूदा राजनीति की इस देवी को अंतिम विदाई देने के लिए मिट गई थी विचारधारा की तमाम लकीरें. टूट गई थी दलीय द्वेष की दीवारें. सुषमा स्वराज के आभामंडल का ही असर था कि पूर्व विदेश मंत्री के अंतिम दर्शन के लिए दूर-दूर से पहुंचे विदेशी मेहमान. और इस सब के बीच प्रधानमंत्री मोदी अपनी सुषमा दीदी के वो दिन याद कर रहे थे, जब सुषमा स्वराज का मतलब संसद में कनिष्ठों के लिए दीदी बन जाना. विदेशों में अटके और भटके हुए लोगों के लिए मां हो जाना.

भगवा संस्कार से दीक्षित छोटे कद की सुषमा स्वराज ने हिंदुस्तान की सियासत में वो ऊंची और मोटी लकीर खींच कर गई हैं, जो मिसाल होगी आने वाली पीढ़ियों के लिए. केसरिया राजनीति को शीर्ष पर पुहंचाने के लिए ज़िंदगी खपा देने वालीं सुषमा दीदी का यूं जाना बहुत अखर रहा है प्रधानमंत्री मोदी को. विदेश मंत्री बनकर विदेश मंत्रालय को गौरवान्वित करने वाली सुषमा की एक-एक बाद दिमाग में गूंज रही है प्रधानमंत्री मोदी की.

सात बार सांसद, तीन बार विधायक, एक बार विदेश मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, सूचना मंत्री, मुख्यमंत्री मतलब लोकतांत्रिक व्यवस्था की तमाम पदवियों को तीन दशकों तक सुशोभित करती रहीं पीएम मोदी की सुषमा दीदी. सरल, सहज और सटीक शब्दों से भरी संसद में विरोधियों के विचारों को छिन्न-भिन्न कर देने वालीं सुषमा को यूं मौन देखकर प्रधानमंत्री मोदी विचलित थे. शांत, सौम्य और वाकपटुता के लिए मशहूर मृदुभाषी सुषमा, प्रधानमंत्री मोदी को बार-बार याद आ रही थीं.

कल्पनाओं को हक़ीकत में बदलने वाली, राजनीति में नई रीति गढ़ने वाली, हिंदुस्तानी सियासत की कई भ्रांतियों को तोड़ने वाली, सुषमा स्वराज को यूं ही याद नहीं कर रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी. वजहें अनंत हैं. विदेश मंत्रालय की दरों दीवार पर मानवता संपूर्ण अध्याय लिखने वाली पूर्व विदेश मंत्री का किसी मुद्दे पर बेबाक बोलना, उस भाषण का शब्द-शब्द प्रधानमंत्री मोदी को याद आ रहा है.

राजनीति शास्त्र की किताब में एक अहम अध्याय का अंत हो गया. सर्वाधिक संतुलित और सम्मोहित वक्त के तौर पर विश्व विख्यात सुषमा स्वराज हमेशा-हमेशा के लिए मौन हो गईं. दुनिया की सबसे बड़ी सभा में हिंदी को बिंदी बनाकर हिंदुस्तान की चमक बिखेरने वाली सुषमा की सांसें शांत हो गई. सासें भले ही थम गई हों, मगर सदियों तक उनकी सांसें महसूस की जाती रहेगी. भले ही धड़कन रूक गई हो सुषमा का, मगर करोड़ों दिलों में अनंतकाल तक धड़कती रहेंगी. जब तक सूरज की छटा बिखरेगी, जब चक चंद्रमा की चमक ज़मी अंधेरी रात को रौशन करेगी, जब तक लोकतंत्र रहेगा तब तलक यूं ही सुषमा स्वराज याद जाएंगी.

ये भी पढ़ें-

PM नरेंद्र मोदी आज कर सकते हैं देश को संबोधित, कश्मीर पर करेंगे बात?

अयोध्या केस: SC ने मालिकाना हक के मांगे सबूत तो निर्मोही अखाड़ा बोला- 1982 में डकैत उठा ले गए दस्तावेज

कंगाली में आटा गीला! भारत से व्‍यापारिक रिश्‍ते तोड़ अपने ही पैर पर कुल्‍हाड़ी मार रहा PAK

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *