मोदी को प्रियंका की सीधी चुनौती, काशी से करेंगी चुनावी अभियान का आगाज

नयी दिल्ली कांग्रेस की नवनियुक्त महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी जल्द ही अपने चार दिन के यूपी दौरे के लिए रवाना होने वाली है. प्रियंका को 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में 41 सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई है. कांग्रेस ने प्रियंका के दौरे का खाका तौयार कर लिया है. […]

नयी दिल्ली

कांग्रेस की नवनियुक्त महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी जल्द ही अपने चार दिन के यूपी दौरे के लिए रवाना होने वाली है. प्रियंका को 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में 41 सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई है. कांग्रेस ने प्रियंका के दौरे का खाका तौयार कर लिया है. प्रियंका गांधी 28 फरवरी से पहले इसकी शुरुआत पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से कर सकती हैं.

जानकारी के मुताबिक प्रियंका अपने काशी दौरे के दौरान पुलवामा आतंकी हमले में शहीद सीआरपीएफ जवान रमेश यादव के परिजनों से मुलाकात कर सकती हैं. इसके अलावा वे कुशीनगर जहरीली शराब कांड के पीड़ितों से भी मुलाकात कर सकती हैं. पार्टी ने प्रियंका के कुंभ जाने का भी प्लान तैयार किया है. अपने दौरे के दौरान वे प्रयागराज कुंभ में साधु-संतों का आशीर्वाद ले सकती हैं. कांग्रेस सूत्रों की मानें तो 28 फरवरी से पहले प्रियंका गांधी का यह दौरा हो सकता है. 28 फरवरी को अहमदाबाद में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग होने वाली है, प्रियंका इससे पहले ही अपनी यूपी दौरा निपटा लेंगी जिससे वो वर्किंग कमेटी में हिस्सा ले सकें.

सक्रिय हो चुका है कांग्रेसी कार्यकर्ता
यूपी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी सचिव प्रकाश जोशी ने कहा, “तीन दिनों तक प्रियंका जी और सिंधिया जी से मिलने के बाद कांग्रेस कैडर सक्रिय हो गया. उन्होंने पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता को सुना. पार्टी अब पूरी ताकत के साथ चुनावी रणक्षेत्र में उतरने के लिए पूरी तरह से तैयार है.” वाराणसी के पार्टी नेताओं के साथ अपनी बैठक में, प्रियंका गांधी ने पिछले पांच वर्षों के लिए प्रधानमंत्री की पहल पर किए गए विकास कार्यों की प्रतिक्रिया मांगी है.

प्रियंका को पता चलेगा 60 और 5 साल के कामों में फर्क
यूपी बीजेपी के महासचिव विजय बहादुर पाठक ने प्रियंका के इस दौरे को लेकर कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि इस दौरे से प्रियंका को पता चल जाएगा कि मोदी, काशी कैसे देश के बाकी हिस्सों की तरह आगे बढ़ रहे हैं. इससे उनको ये भी एहसास होगा कि कैसे उनका परिवार 60 से अधिक वर्षों तक देश चला रहा था और मोदी जी ने पांच साल में चलाया. दोनों में फर्क नजर आ जाएगा. अंत में, काशी की यात्रा भी उन्हें समझाएगी कि मोदी न केवल काशी के सांसद के रूप में, बल्कि देश के पीएम के रूप में भी वापसी करेंगे.