Coronavirus: देश में 4 तरह की वैक्सीन पर रिसर्च, अक्टूबर तक सफलता की उम्मीद

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Science and Technology) की तरफ से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार के प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर विजय राघवन ने बताया कि देश में जल्द से जल्द कोरोनावायरस (coronavirus) वैक्सीन को खोजने की कोशिश की जा रही है.
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नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल और भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. के विजय राघवन (K Vijay Raghavan) ने कोरोनावायरस (Coronavirus) को लेकर गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की.

डॉ. के विजय राघवन ने कहा कि भारत में 4 तरह की वैक्सीन बनाने की कोशिश हम लोग कर रहे हैं लेकिन वैक्सीन बनने के बाद पहले ही दिन वैक्सीन मिल जाए ये नहीं हो सकता.

विजय राघवन ने कहा कि COVID-19 के लिए देश में वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया जोरों पर है और अक्टूबर तक कुछ कंपनियों को इसकी प्री क्लीनिकल स्टडीज तक पहुंचने में सफलता मिल सकती है.

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विजय राघवन ने कहा कि साधारणतः वैक्सीन 10-15 साल में बनता है और इसकी लागत 200 मिलियन डॉलर के करीब होती है. अब हमारी कोशिश है कि इसे एक साल में बनाया जाए इसलिए एक वैक्सीन पर काम करने की जगह हम लोग एक ही समय में 100 से अधिक वैक्सीन पर काम कर रहे हैं.

विजय राघवन ने बताया कि देश में हम सब चार तरह के वैक्सीन बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

  • 1. mRNA वैक्सीन वायरस के जेनेटिक मेटिरियल को ही लेकर जब आप इन्जेक्ट कर लेते हैं.
  • 2. स्टैंडर्ड वैक्सीन जो वायरस के कमजोर वर्ज़न को लेकर बनाया जाता है पर उससे बीमारी नहीं फैलती.
  • 3. किसी और वायरस की बैकबोन में कोरोना के वायरस की प्रोटीन कोडिंग को लगाकर के वैक्सीन बनाया जाता है.
  • 4. वायरस का प्रोटीन लैब में बनाकर उसको एक किसी दूसरे स्टीमुलस के साथ लगाया जाता है.

डॉ पॉल ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में हमारे कई संस्थान काम कर रहे हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद COVID-19 से लड़ाई में लगे हुए हैं. हमारी दवाइयों से ही एचआईवी सहित कई रोगों के लिए दवाइयां तैयार की जाती है. वैक्सीन बनाने में भी हम काफी आगे हैं.

डॉ वीके पॉल ने कहा कि कोरोना से निपटने में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल भारत में जारी रहेगा. कोरोना से निपटने में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल दिशा-निर्देश और एहतियात के साथ हो सकता है.

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