बदला लेने आया गाज़ी ही हुआ सेना के बदले का शिकार!

Share this on WhatsAppपांच दिनों के भीतर भारतीय सुरक्षाबलों ने पुलवामा में शहीद हुए 42 CRPF जवानों की मौत का बदला ले लिया. CRPF काफिले में विस्फोटक से भरी कार को भिड़ानेवाले आतंकी के गुरू अब्दुल रशीद गाज़ी को सुरक्षाबलों ने पुलवामा के पिंगलिना की मुठभेड़ में मार गिराया. आदिल नाम के स्थानीय लड़के ने […]

पांच दिनों के भीतर भारतीय सुरक्षाबलों ने पुलवामा में शहीद हुए 42 CRPF जवानों की मौत का बदला ले लिया. CRPF काफिले में विस्फोटक से भरी कार को भिड़ानेवाले आतंकी के गुरू अब्दुल रशीद गाज़ी को सुरक्षाबलों ने पुलवामा के पिंगलिना की मुठभेड़ में मार गिराया.

आदिल नाम के स्थानीय लड़के ने वारदात को अंजाम दिया था, जबकि गाज़ी को ही साज़िश का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. 

कौन था जैश के सरगना का करीबी गाज़ी?

अब्दुल रशीद गाज़ी जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अज़हर का बेहद करीबी था। उसकी अहमियत जैश के लिए इसी बात से समझी जा सकती है कि भारत की ज़मीन पर होनेवाले संगठन के सारे ऑपरेशन गाज़ी की ही सरपरस्ती में अंजाम दिए जाते थे.

IED बनाने में उसे महारत थी और आतंकी आदिल को उसी ने ट्रेनिंग दी थी. खुद गाज़ी की ट्रेनिंग तालिबान की निगहबानी में अफगानिस्तान के कैंपों में पूरी हुई थी. कश्मीर के मोर्चे पर आतंक फैलाने से पहले वो पीओके के आतंकी कैंप में खूब देखा गया. उससे पहले पाकिस्तान-अफगानिस्तान की सीमा पर वो नाटो फोर्स से भी लड़ता रहा था. सूत्र कहते हैं कि कश्मीर में जब से गाज़ी घुसा तब से जैश के हमलों का तरीका तालिबान जैसा हो गया. कामरान नाम से भी चर्चित ये आतंकी पाकिस्तान का नागरिक था.

मसूद अज़हर की तरफ से बदला लेने पहुंचा था गाज़ी

जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अज़हर के भतीजे तल्हा रशीद (2017) और उस्मान रशीद (2018) को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था. उस्मान सुरक्षाबलों पर हमले करने में शामिल था. एनकाउंटर के बाद उसके पास से अमेरिका में निर्मित ऐसी बंदूक मिली जिसका इस्तेमाल हाल तक आतंकी नहीं करते थे.

दोनों की मौत को सुरक्षाबलों की बड़ी उपलब्धि माना गया. तभी जैश-ए-मोहम्मद ने बदला लेने की धमकी दी थी. उसी के बाद अब्दुल रशीद गाज़ी को जैश के और दो कमांडरों के साथ बदला लेने के लिए भेजा गया. कोशिश हो रही थी कि संसद पर हमले के मास्टरमाइंड अफज़ल गुरू की बरसी 9 फरवरी के आसपास हमला करके सुरक्षाबलों को झटका दिया जाए.

इसके अलावा साल 2018 में जैश-ए-मोहम्मद के टॉप कमांडरों समेत सैन्यबलों ने 230 आतंकियों का सफाया कर डाला था, जिससे आतंकी जमात बुरी तरह बौखलाई हुई थी.

 

पुलवामा की वारदात को अंजाम देनेवाले को दी ट्रेनिंग

सरहद पार कर कश्मीर में घुसे गाज़ी को सुरक्षाबलों से बदला लेने का ज़िम्मा सौंपा गया था. उसने पुलवामा में अपना ठिकाना बनाया. CRPF काफिले पर हमला करनेवाला आदिल भी पुलवामा का ही रहनेवाला था. आदिल ने गाज़ी से कार बॉम्ब की पूरी ट्रेनिंग ली. सुरक्षाबलों ने पहले कभी आदिल को बड़े आतंकियों के साथ नहीं देखा था इसलिए उसे C ग्रेड आतंकी माना जा रहा था, लेकिन पुलवामा का आतंकी हमला ग्रेड A के आतंकियों की हरकतों से भी आगे की वारदात मानी जा रही है. गाज़ी नए लड़कों को भर्ती करने के अलावा उनकी ट्रेनिंग का बड़ा ज़िम्मा उठाए हुए था. 

सुरक्षाबलों को गाज़ी की घुसपैठ का पहले से पता था. पुलवामा की घटना के बाद उसे खोज निकालने का ऑपरेशन भी ज़ोरशोर से जारी थी. ज़ाहिर है, अगर उसे मारा ना जाता तो आनेवाले दिनों में घाटी को और भी घातक आत्मघाती हमले देखने पड़ सकते थे.

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