अगले महीने देश में आएगा पहला राफेल, जानिए पाकिस्तानी F-16 का कैसे देगा मुंहतोड़ जवाब?

पाकिस्तान अब तक अपने F-16 पर फूला नहीं समाता था लेकिन अगले महीने से भारत को राफेल मिलने वाले हैं. आइए जानते हैं कि क्यों राफेल को F-16 का मुंहतोड़ जवाब माना जा रहा है.

राफेल लड़ाकू विमान की पहली खेप लेने के लिए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ फ्रांस जाएंगे. 20 सितंबर को दसॉ एविएशन पहला राफेल जेट भारत को सौंप देगी जिसका बेसब्री से इंतज़ार हो रहा था. कुल 36 विमान आने हैं और माना जा रहा है कि भारतीय वायुसेना में इनके शामिल होते ही पाकिस्तान के F-16 का माकूल जवाब तैयार हो जाएगा.

तो आइए जानते हैं कि भारत का राफेल पाकिस्तान के फाल्कन का मुकाबला कैसे करेगा..

एक तरफ F-16 है जो फोर्थ जेनेरेशन सिंगल इंजन सुपरसोनिक मल्टीरोल एयरक्राफ्ट है तो दूसरी तरफ राफेल है जो एक ट्विन जेट लड़ाकू विमान है जिसमें एयरक्राफ्ट कैरियर और ज़मीनी बेस दोनों से ही उड़ान भरने की क्षमता है.

दोनों विमान 50 हजार फीट तक की ऊंचाई पर उड़ सकते हैं. हालांकि राफेल रेंज और स्पीड में F-16 से पीछे है लेकिन कम देरी में ऊंचाई पहुंचने के मामले में राफेल आगे है. इसके अलावा ईंधन क्षमता की बात करें तो इस मामले में F-16  राफेल के सामने उन्नीस ही साबित होता है. हां, ये ठीक है कि F-16 में F-22 और F-35 वाली तकनीक जैसे  Active Electronically Scanned Array (AESA) APG-83 रडार की क्षमता है. ये 120 किलोमीटर के दायरे में दुश्मन को खोजकर खत्म कर सकता है. वहीं अब बात राफेल की करें तो उसमें 4 तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है.

पहली है मल्टी डायरेक्शन रडार जो सौ किलोमीटर के दायरे में एक साथ 40 टारगेट ढूंढ सकता है. दूसरी तकनीक है Undetectable Passive Radar Sensor जो एक सटीक ऑप्टिकल कैमरा है. तीसरी तकनीक है Recognizance Pod जो ऐसा डिजिटल कैमरा है जिसमें किसी भी गति पर फोटो खींचा जा सकता है.

चौथी तकनीक है स्पेक्ट्रा डिफेंस सिस्टम जिसमें  दुश्मन के रडार सिग्नल को जाम करने की योग्यता है. ये मिसाइल आने की चेतावनी देता है और अगर मिसाइल विमान के काफी पास आ जाए तो decoy सिग्नल छोड़ता है. ये सिग्नल प्लेन के पीछे से छूटते हैं और दुश्मन की मिसाइल को लक्ष्य से भटका देते हैं.