राफेल डील पर SC क्यों करेगा दोबारा सुनवाई, किसे माना सबूत, कैसे बढ़ेगी मोदी सरकार की मुश्किल, जानें

देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका को स्वीकार कर दिया है. अब कोर्ट इस मामले में सुनवाई करेगी. लोकसभा चुनावों से पहले पीएम मोदी के लिए ये बड़ा झटका है.

नई दिल्ली: 2019 लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान होने में अब 24 घंटे का वक्त भी नहीं बचा है. उससे पहले देश की सर्वोच्च अदालत से केंद्र सरकार को करारा झटका लगा है. सर्वोच्च अदालत ने केंद्र की याचिका खारिज कर दी है अब राफेल डील पर कोर्ट दोबारा से सुनवाई करेगा.

राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय से लीक हुए दस्तावेजों की वैधता को मंजूरी दे दी है. कोर्ट के फैसले के मुताबिक दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का हिस्सा होंगे.

पांच बड़े प्वाइंट
1- अब तक पीएम मोदी हर चुनावी रैली में राफेल डील के मामले में सुप्रीम कोर्ट की दुहाई दे रहे थे. राफेल का विवाद होने के बाद पीएम मोदी ने कहा था कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिल चुकी है. ऐसे में विपक्ष जानबूझकर इस मुद्दे को चुनावी मुद्दा बना रही है. अब विपक्ष दोबारा से पीएम मोदी पर हमलावर हो चुका है.

2- राफेल डील मामले पर यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, और प्रशांत भूषण ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी. याचिकाकर्ताओं ने सबूत के तौर पर कुछ डॉक्यूमेंट्स जमा किये थे. केंद्र सरकार ने आरोप लगाया था कि ये कागज चोरी किए गए, अब कोर्ट इन्हीं सबूतों के आधार पर आगे की सुनवाई करेगी.

3- केंद्र सरकार ने यह कहकर पुनर्विचार याचिका का विरोध किया था कि जिन दस्तावेजों को याचिका का आधार बनाया जा रहा है, वे भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 के तहत सबूत नहीं माने जा सकते. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की इस आपत्ति पर अपना फैसला 14 मार्च को सुरक्षित रख लिया था, लेकिन 10 अप्रैल को कोर्ट ने कहा कि इन दस्तावेजों को सुनवाई में शामिल कर सकते हैं.

4- अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि कोई भी इन दस्तावेजों को बिना संबंधित विभाग की इजाजत के कोर्ट में पेश नहीं कर सकता. ये दस्तावेज ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत सुरक्षित हैं. सेक्शन 8(1)(ए) के तहत आरटीआई के दायरे से भी बाहर हैं. तब, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि जब हम केंद्र की आपत्ति पर फैसला करने के बाद ही पुनर्विचार याचिकाओं के दूसरे पहलुओं पर सोचेंगे.

5- अब पीएम मोदी पर विपक्ष पूरी तरह से हमलावर हो चुका है और पीएम मोदी इस पर जवाब नहीं दे पा रहे हैं. लोकसभा चुनाव से पहले ये डील का लफड़ा मोदी का सिरदर्द बन सकता है. फिलहाल राफेल मामले में दोबारा से सुनवाई पर सबकी नजर होगी. आखिरकार सुप्रीम कोर्ट इसमें क्या फैसला सुनाता है ये देखना होगा.