पहले चार राफेल जेट्स में लगी होंगी Meteor मिसाइलें, दुश्‍मन को नहीं देतीं बचने का कोई मौका

अक्‍टूबर में जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फ्रांस गए थे, तब चार राफेल जेट्स के साथ 8-10 Meteor मिसाइल्‍स भेजने की बात तय हुई थी.

अगले साल तक राफेल लड़ाकू विमान भारत आ जाएंगे. अंबाला एयरबेस पर जो पहले चार जेट्स आएंगे, उसमें Meteor एयर-टू-एयर मिसाइल्‍स लगी होंगी. इन्‍हें हवाई लड़ाई के लिए दुनिया की बेस्‍ट मिसाइल माना जाता है. अक्‍टूबर में जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फ्रांस गए थे, तब चार राफेल जेट्स के साथ 8-10 ऐसी मिसाइल्‍स भेजने की बात तय हुई थी. पाकिस्‍तान के साथ हालात को देखते हुए, भारत ने मिसाइलों की जल्‍द डिलीवरी करने को कहा है.

क्‍यों खास है Meteor मिसाइल?

बियांड विजुअल रेंज (BVR) वाली यह मिसाइल 120 से 150 किलोमीटर तक मार करती है. इसमें एडवांस्‍ड एक्टिव रडार सीकर लगा है जो इसे किसी भी मौसम में काम करने लायक बनाता है. Meteor से छोटे ड्रोन्‍स से लेकर क्रूज मिसाइल्‍स, यहां तक कि सुपरफास्‍ट जेट्स तक को निशाना बनाया जा सकता है. टू-वे डेटा लिंक के जरिए बीच में टारगेट बदला जा सकता है. करीब 190 किलो की यह मिसाइल 150 किलोमीटर की रेंज में हमला कर सकती है.

Meteor में 60 किलोमीटर से ज्‍यादा का ‘नो एस्‍केप जोन’ है यानी मिसाइल की स्‍पीड इतनी होगी कि 60 किलोमीटर के दायरे में दुश्‍मन कोई कदम उठाए, उससे पहले ही वो तबाह हो जाएगा. पाकिस्‍तान और चीन के पास इस क्‍लास की कोई मिसाइल नहीं है. राफेल में Meteor के अलावा Scalp मिसाइल भी होगी जिसकी रेंज 300 किलोमीटर से ज्‍यादा है.

AMRAAMs के जवाब में Meteor

राफेल को जल्‍द Meteor मिसाइल्‍स से लैस करने का फैसला नौशेरा में 27 फरवरी को पाकिस्‍तानी एयरफोर्स के साथ मुठभेड़ के बाद हुआ. पाकिस्‍तान ने F-16s भेजे थे. भारत ने सुखोई-30MKI और बाकी जेट्स लगाए मगर सामना करने में मुश्किल हुई. F-16s में AIM-120C एडवांस्‍ड मीडियम रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल्‍स (AMRAAMs) लगी थीं. इनकी रेंज करीब 100 किलोमीटर होती है.

फ्रांस ने अब तक भारत को तीन राफेल सौंपे हैं. एयरफोर्स पायट्स, इंजीनियर्स और टेक्‍नीशियंस की एक टीम फ्रांस में ट्रेनिंग ले रही है. यह ट्रेनिंग पूरी होने के बाद, मई 2020 तक चारों राफेल भारत के लिए उड़ान भरेंगे. सभी 36 राफेल अप्रैल 2022 तक भारत आ जाएंगे.

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