फेसबुक भाग रहा है और उस पर लगे आरोप बिना किसी आधार के नहीं हैं : राघव चड्ढा

राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने कहा कि इस तरह से कमेटी के सामने पेश होने से इनकार कर देना, यह सीधे तौर पर दिल्ली विधानसभा (Delhi Assembly) का अपमान है और दिल्ली के दो करोड़ आबादी वाले राज्य के लोगों का विरोध करना है.

दिल्ली विधानसभा (Delhi Assembly) की शांति और सद्भाव समिति को लगता है कि फेसबुक इंडिया (Facebook India) जानबूझकर कानूनी प्रक्रिया से बचने की कोशिश कर रहा है. फेसबुक अपने ऊपर पर लगे गंभीर आरोपों की वास्तविकता का पता लगाने में सहयोग नहीं कर रहा है. समिति के मुताबिक, फेसबुक भाग रहा है और उस पर लगे आरोप बिना किसी आधार के नहीं हैं.

शांति और सद्भाव समिति के चेयरमैन राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने कहा, “भारत के संविधान से मिलीं शक्तियों और विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए समिति ने फेसबुक इंडिया के अधिकारी को समिति के सामने पेश होने का एक और अवसर देने का फैसला लिया है. इसके बाद भी वह उपस्थित नहीं होते हैं, तो नियम के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.”

‘फेसबुक के ऊपर हैं कई गंभीर आरोप’

राघव चड्ढा ने कहा, “कई सारे सबूत इस कमेटी (Peace and Harmony Committee) के सामने पेश किए गए. यह कमेटी अपनी पिछली बैठक में इस नतीजे पर पहुंची थी कि फेसबुक के ऊपर कई सारे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इसी साल फरवरी महीने में दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों (Communal Riots) में फेसबुक की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हुए.”

उन्होंने कहा, “कुछ सबूत ऐसे रखे गए, जिसमें नजर आया कि फेसबुक ने दंगा शांत कराना तो दूर, बल्कि दंगा भड़काने का काम किया. उसी के चलते कमेटी इस नतीजे पर पहुंची थी कि इतने दिनों की कार्रवाई के बाद यह बहुत जरूरी हो जाता है कि फेसबुक इंडिया के आला अधिकारियों को इस कमेटी के सामने आकर अपना बयान दर्ज कराने और उन पर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए बुलाया जाए.”

फेसबुक इंडिया ने कमेटी से नोटिस वापस लेने के लिए कहा

राघव ने कहा, “मोटे तौर पर फेसबुक इंडिया इस कमेटी को यह सलाह दी है कि हम इस नोटिस को वापस ले लें. यह विषय संसद की इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी समिति के सामने विचाराधीन है और फेसबुक के आला अधिकारी वहां पेश हुए, तो हमें इस मामले में नहीं घुसना चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहने का प्रयास किया है कि क्योंकि यह कानून व्यवस्था (Law and Order) से संबंधित मसला है. आईटी एक्ट संसद का पारित किया गया कानून है, उससे संबंधित मसला है, तो हमें इस विषय में नहीं पड़ना चाहिए.”

‘कमेटी के नोटिस का अपमान दिल्ली विधानसभा का अपमान’

राघव चड्ढा ने कहा, “इस तरह से इस कमेटी के नोटिस का अपमान करना और कमेटी के सामने पेश होने से इनकार कर देना, यह सीधे तौर पर दिल्ली विधानसभा का अपमान है और दिल्ली विधानसभा को कौन चुनता है, इसमें कौन लोग बैठते हैं, यह दिल्ली का मतदाता तय करता है. इस कमेटी का अपमान करना, दिल्ली के दो करोड़ आबादी वाले राज्य के लोगों का विरोध करना है. मैं यह समझता हूं कि जो फेसबुक इंडिया के वकील हैं या जो उनके कानून के जानकार हैं, उन्होंने इन्हें बहुत गलत सलाह दी है.”

‘कमेटी भी इस विषय पर चर्चा कर सकती है’

राघव चड्ढा ने कहा, “कोई भी विषय संसदीय समिति (Parliamentary Committee) के अधीन हो, तो इसका यह मतलब नहीं कि दिल्ली विधानसभा उस विषय पर चर्चा नहीं कर सकती है. हमारा देश एक संघीय ढांचा (Federal Structure) है, जिसमें संसद अपने विषय पर चर्चा करता है और राज्य विधानसभा अलग विषयों पर चर्चा करती है. एक समय में एक ही मुद्दे पर भी चर्चा की जा सकती है.” (IANS)

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