संविधान-लोकतंत्र का नाम लेकर केंद्र पर निशाना, राहुल-प्रियंका ने लिखा- महबूबा मुफ्ती को रिहा करो

वहीं, प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने ट्वीट में लिखा, "हिंदुस्तान के संविधान और लोकतंत्र में आस्था रखने वाले नेताओं के साथ केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा रवैया तानाशाही का प्रतीक है."
rahul gandhi priyanka gandhi, संविधान-लोकतंत्र का नाम लेकर केंद्र पर निशाना, राहुल-प्रियंका ने लिखा- महबूबा मुफ्ती को रिहा करो

कांग्रेस (Congress) के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट करके पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) की रिहाई की मांग की है.

राहुल गांधी का ट्वीट

राहुल गांधी ने ट्वीट किया, “लोकतंत्र को उस समय ज्यादा नुकसान पहुंचता है जब भारत सरकार गैरकानूनी तरीके से सियासी दलों के नेताओं को हिरासत में लेती है. ये बेहद सही समय है जब महबूबा मुफ्ती को छोड़ा जाए.”

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प्रियंका ने बोला हमला

वहीं, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट करके कहा कि महबूबा मुफ्ती को नजरबंद रखना आलोकतंत्रिक और असंवैधानिक है. उन्हें रिहा करना चाहिए.


प्रियंका गांधी ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “हिंदुस्तान के संविधान और लोकतंत्र में आस्था रखने वाले नेताओं के साथ केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा रवैया तानाशाही का प्रतीक है. भाजपा सरकार लोकतंत्र की सबसे मजबूत शैली ‘बातचीत’ से नजरें चुराने के लिए नेताओं की नजरबंदी को अपना हथियार बना रही है.”

चिदंबरम ने भी की रिहाई की मांग

इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी बढ़ाने का विरोध किया था. उन्होंने शनिवार को कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत मुफ्ती की नजरबंदी बढ़ाना कानून का ही उल्लंघन नहीं है बल्कि नागरिकों को मिले संवैधानिक अधिकारों पर भी हमला है.


चिदंबरम ने ट्वीट किया, “पीएसए के तहत महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी का विस्तार कानून का दुरुपयोग है और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला है. 61 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री, चौबीसो घंटे सुरक्षा गार्ड से संरक्षित व्यक्ति, सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा कैसे है?”

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि ‘उन्होंने उन शर्तों को जारी करने के प्रस्ताव को सही ढंग से खारिज कर दिया, जो कोई भी स्वाभिमानी राजनीतिक नेता मना कर देता. उनकी नजरबंदी के लिए दिए गए कारणों में से एक- उनकी पार्टी के झंडे का रंग है- जो हंसी का पात्र था. उन्हें अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के खिलाफ क्यों नहीं बोलना चाहिए? क्या यह स्वतंत्र भाषण के अधिकार का हिस्सा नहीं है?’

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