हिंदुस्तान के गरीब, किसान, मजदूर और छोटे दुकानदार पर आक्रमण था नोटबंदी: राहुल गांधी

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा, “8 नवंबर 8:00 बजे 2016, प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का निर्णय लिया. 500 रुपये और 1000 रुपये का नोट रद्द कर दिया. पूरा हिंदुस्तान बैंक के सामने जाकर खड़ा हुआ. आपने अपना पैसा अपनी आमदनी बैंक के अंदर डाल दी.”

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 2:42 pm, Thu, 3 September 20

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने केंद्र सरकार (Central Government) पर एक बार फिर निशाना साधा है. राहुल गांधी ने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है. वीडियो में राहुल कहते हैं कि नोटबंदी (Demonetization) हिंदुस्तान के गरीब, किसान, मजदूर और छोटे दुकानदार पर आक्रमण था. नोटबंदी हिंदुस्तान के असंगठित अर्थव्यवस्था पर आक्रमण था. उन्होंने कहा, “8 नवंबर 8:00 बजे 2016, प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का निर्णय लिया. 500 रुपये और 1000 रुपये का नोट रद्द कर दिया. पूरा हिंदुस्तान बैंक के सामने जाकर खड़ा हुआ. आपने अपना पैसा अपनी आमदनी बैंक के अंदर डाल दी.”

राहुल गांधी कहा, “पहला सवाल- काला धन मिटा? नहीं. दूसरा सवाल- हिंदुस्तान के गरीब जनता को नोटबंदी से क्या फायदा मिला? जवाब- कुछ नहीं. तो फायदा किसको मिला? फायदा हिंदुस्तान के सबसे बड़े अरबपतियों को मिला. कैसे? आपका जो पैसा था आपके जेब में से आपके घरों में से निकालकर उसका प्रयोग सरकार ने इन लोगों का कर्जा माफ करने के लिए किया.”

‘कैशलेस से असंगठित अर्थव्यवस्था खत्म हो जाएगी’

कांग्रेस नेता ने कहा कि वह सिर्फ एक लक्ष्य था. दूसरा लक्ष्य भी छुपा हुआ था. जो था जमीन साफ करने का, जो हमारा इनफॉर्मल सेक्टर है, असंगठित अर्थव्यवस्था का सेक्टर है, वो कैश पर चलता है. छोटा दुकानदार हो, किसान हो, मजदूर हो वो कैश से काम करता है.

उन्होंने कहा, “नोटबंदी का दूसरा लक्ष्य असंगठित अर्थव्यवस्था के सिस्टम से नकद कैश को निकालने का था. प्रधानमंत्री ने स्वयं कहा कि वह कैशलेस इंडिया चाहते हैं. कैशलेस हिंदुस्तान चाहते हैं. अगर कैशलेस हिंदुस्तान होगा तो असंगठित अर्थव्यवस्था तो खत्म हो जाएगी.”

‘हमें इस आक्रमण को पहचानना पड़ेगा’

राहुल गांधी ने कहा, “नुकसान किसको हुआ? किसानों को, मजदूरों को, छोटे दुकानदारों को, स्मॉल एंड मीडियम बिजनेस वालों को…
जो कैश का प्रयोग करते हैं, जो बिना कैश जी हीं नहीं सकते. नोटबंदी हिंदुस्तान के गरीब, किसान, मजदूर और छोटे दुकानदार पर आक्रमण था.”

उन्होंने कहा कि नोटबंदी हिंदुस्तान के असंगठित अर्थव्यवस्था पर आक्रमण था और हमें इस आक्रमण को पहचानना पड़ेगा. पूरे देश को मिलकर इसके खिलाफ लड़ना पड़ेगा.