काश, कोविड स्‍ट्रैटजी ही मन की बात होती, राहुल गांधी का सरकार पर तंज

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने रविवार को ट्वीट करके कहा, "सवाल तो जायज है, लेकिन सरकार के जवाब का भारत कब तक इंतजार करेगा? काश, कोविड एक्सेस स्ट्रैटेजी ही मन की बात होती."

कांग्रेस (Congress) के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) लगातार कोरोनावायरस महामारी (Coronavirus Epidemic) को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं. राहुल का आरोप है कि सरकार कोरोना को रोकने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं कर रही है. इसी सिलसिले में राहुल गांधी ने रविवार को ट्वीट करके कहा, “सवाल तो जायज है, लेकिन सरकार के जवाब का भारत कब तक इंतजार करेगा? काश, कोविड एक्सेस स्ट्रैटेजी ही मन की बात होती.”

दरअसल, खुराक उत्पादन के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट के शीर्ष अधिकारी ने सरकार से कहा कि देश में सभी को कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए 80,000 करोड़ रुपये की जरूरत है. ऐसे में क्या सरकार के पास इतने रुपये हैं? राहुल गांधी का ट्वीट इसी को लेकर सरकार पर तंज कस रहा है.

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कृषि विधेयक को लेकर सरकार पर निशाना

राहुल गांधी ने इससे पहले कृषि विधेयक को लेकर सरकार पर निशाना साधा था. राहुल ने केंद्र सरकार से आग्रह किया था कि हाल में संसद से पारित कृषि संबंधी विधेयकों को वापस लिया जाए और किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी सुनिश्चित की जाए.

‘मन की बात’ में क्या बोले पीएम मोदी

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ के दौरान संसद में पास हुए तीन विधेयकों से किसानों को होने वाले लाभ के बारे में चर्चा की. उन्होंने बताया कि अब किसानों को अपनी उपज को देश में कहीं भी बेचने की आजादी मिली है.

‘कोरोना काल में भी कृषि क्षेत्र का दमखम’

प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना काल में भी कृषि क्षेत्र के दमखम दिखाने की सराहना की. प्रधानमंत्री ने कहा कि जो जमीन से जितना जुड़ा होता है, वो, बड़े से बड़े तूफानों से भी उतना अडिग रहता है. कोरोना के इस कठिन समय में हमारा कृषि क्षेत्र, हमारा किसान इसका जीवंत उदाहरण हैं. संकट के इस काल में भी हमारे देश के कृषि क्षेत्र ने फिर अपना दमखम दिखाया है.

‘किसानों की स्थिति बदली’

प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि बिलों को लेकर कहा, फल-सब्जियों के अतिरिक्त किसान अपने खेत में, जो कुछ पैदा कर रहे हैं, धान, गेहूं, सरसों, गन्ना उसको अपनी इच्छा अनुसार जहां ज्यादा दाम मिले, वहीं पर बेचने की आजादी मिल गई है. 3-4 साल पहले ही महाराष्ट्र में फल और सब्जियों को एपीएमसी के दायरे से बाहर किया गया था. इस बदलाव ने महाराष्ट्र के फल और सब्जी उगाने वाले किसानों की स्थिति बदली है.

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