दिल है कि मानता नहीं! 3-3 गोलियां खाकर भी जम्मू में तैनाती चाहता है, मकसद- दुश्मनों को धूल चटाना

Share this on WhatsApp फतेहपुर: भारतीय सेना के जवानों के ज़ज़्बे को सलाम. जम्मू कश्मीर में इनके एक नहीं तीन-तीन गोलियां लगीं, 6 महीने तक इलाज़ कराया और अब एकबारगी फिर मोर्चा लेने को ये तैयार हो गए. कुछ ऐसी ही कहानी है राजस्थान के फतेहपुर के वार्डन. 4 निवासी हवलदार महेंद्र भामू की. आतंकियों […]

फतेहपुर: भारतीय सेना के जवानों के ज़ज़्बे को सलाम. जम्मू कश्मीर में इनके एक नहीं तीन-तीन गोलियां लगीं, 6 महीने तक इलाज़ कराया और अब एकबारगी फिर मोर्चा लेने को ये तैयार हो गए. कुछ ऐसी ही कहानी है राजस्थान के फतेहपुर के वार्डन. 4 निवासी हवलदार महेंद्र भामू की. आतंकियों से मुठभेड़ के बाद गंभीर रूप से घायल हुआ ये जवान अब भी उसी जगह जाकर आतंकियों से लोहा लेने की बात कर रहा है. आइये जानते हैं मुठभेड़ और कश्मीरियों की कहानी इसी की जुबानी.

मुठभेड़ का पल-पल का हाल
महेंद्र बताते हैं- तारीख थी 10 जुलाई. हमारी यूनिट कैंप में थी, इतने में ही समाचार मिला कि कुंडलन गांव में एक मकान में 5 आतंकी छिपे हैं. कंपनी कमाण्डर के आदेश पर हमने रात दो बजे उस घर को घेर लिया था. मैं उस घर से मात्र बीस मीटर की दूरी पर कॉर्नर पर खड़ा था. हमने अनाउंस किया कि इस घर में यदि कोई सिविलियन हैं तो बाहर आ जाएं. इसके बाद दो महिला, एक बुजुर्ग बाहर आकर सामने वाले मकान में चले गए. इसी का फायदा उठाते हुए दो आतंकी भी फरार हो गए.

सुबह करीब चार बजे आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी. हमारी ओर से भी काउंटर फायरिंग शुरू की गई. इसी दौरान हमारे एक साथी के गोली लग गई और उसे अस्पताल भिजवाया गया. लगातार फायरिंग होती रही. इस दौरान हमारे एक अन्य साथी के गोली लग गई. फिर हुई फायरिंग में हमने दो आतंकियों को मार गिराया. एक आतंकी वहीं छिपा हुआ था, वह फायरिंग कर रहा था. उसके बाद आतंकी ने पहली मंजिल से फायरिंग शुरू की. इस दौरान तीन गोलियां मेरे बाएं पैर में लग गई. मुझे वहां से अस्पताल पहुंचाया गया. ये मुठभेड़ सुबह 11 बजे तक चली. फिर तीसरा आतंकी भी ढेर कर दिया गया. इस ऑपरेशन में यूनिट के 250 जवान शामिल थे, लेकिन सबसे आगे मोर्चा संभालने वालों में मैं भी शामिल था.

सेना का साथ नहीं देते कश्मीरी
महेंद्र 8 जाट रेजिमेंट में 1999 में भर्ती हुए थे. इस समय वह 34 राष्ट्रीय राइफल में कश्मीर के शोपियां जिले में तैनात हैं. करीब ढाई साल से जम्मू कश्मीर में तैनात रहे महेंद्र भामू का कहना है कि वहां की जनता को सेना से बिल्कुल लगाव नहीं है. वहां के लोग मानते है कि सेना उसके पक्ष में नहीं है, जबकि सेना उनका भला ही करती है. ऑपरेशन के दौरान वहां के लोग हर वो प्रयास करते है, जिससे सेना परेशान हो सके. ऑपरेशन के दौरान पत्थरबाज पत्थर फेंकना शुरू कर देते हैं. किसी मकान के पास बैठते हैं या लेटते हैं तो तो गर्म पानी गिरा देते हैं.

फिर जाना चाहता हूं जम्मू
भामू का कहना है कि उनका देश सेवा का ज़ज्बा घायल होने के बाद भी कम नहीं हुआ. मैं फिर जम्मू जाना चाहता हूं ताकि देश की सेवा में बेहतर योगदान दे सकूं. आतंकियों से कई बार सामना हो चुका है. आतंकियों के साथ साथ वहां की जनता से भी सामना करना पड़ता है, लेकिन मैं साथियों के साथ वहीं रहकर आतंकियों से लोहा लेना चाहता हूं. अब सेना ने बरेली जाने का आर्डर किया है, इसके बाद मैंने लिखकर दिया है, मुझे जम्मू कश्मीर में ही रखा जाएं.वहां अभी भी स्थिति नाजुक बनी हुई है, इसलिए मां भारती की मुझे अभी सेवा करनी है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *