“सिर्फ हिंदी ही नहीं, किसी भाषा को नहीं थोपा जाना चाहिए”, ‘वन नेशन, वन लैंग्वेज’ पर बोले रजनीकांत

रजनीकांत ने कहा कि हिंदी को यदि थोपा जाता है तो इसे तमिलनाडु में कोई स्वीकार नहीं करेगा.

सुपरस्टार रजनीकांत भी ‘वन नेशन, वन लैंग्वेज’ के विरोध में उतर आए हैं. रजनीकांत ने बुधवार को कहा कि अगर हिंदी को पूरे देश में थोपा गया तो तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के सभी राज्य इसका विरोध करेंगे.

रजनीकांत ने कहा, “हिंदी को थोपा नहीं जाना चाहिए. केवल तमिलनाडु ही नहीं बल्कि अन्य दक्षिणी राज्य भी इसे स्वीकार नहीं करेंगे. सिर्फ हिंदी ही नहीं, किसी भी भाषा को थोपा नहीं जाना चाहिए. अगर एक कॉमन लैंग्वेज देश की एकता और उन्नति के लिए अच्छी भी हो तो उसे थोपना गलत है.”

कमल हासन ने भी किया विरोध
इससे पहले मक्कल नीधि मय्यम (MNM) के संस्थापक व दिग्ग्ज एक्टर कमल हासन ने हिंदी को थोपने के किसी भी प्रयास का विरोध किया था. उन्होंने सोमवार को कहा कि यह दशकों पहले देश से किया गया एक वादा था, जिसे ‘किसी शाह, सुल्तान या सम्राट को तोड़ना नहीं चाहिए.’

उन्होंने एक वीडियो में कहा, “विविधता में एकता का एक वादा है जिसे हमने तब किया था जब हमने भारत को एक गणतंत्र बनाया था. अब, उस वादे को किसी शाह, सुल्तान या सम्राट को तोड़ना नहीं चाहिए. हम सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन हमारी मातृभाषा हमेशा तमिल रहेगी.”

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