परमात्‍मा करे कि ऐसा पड़ोसी किसी को न मिले, बोले राजनाथ सिंह

आर्टिकल 370 में संशोधन को लेकर पेश किए गए बिल के दौरान भी गृह मंत्री अमित शाह ने यही कहा था कि इसे हटाए जाने से घाटी में आतंकवाद कम होगा.


नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का मुद्दा पड़ोसी मुल्क़ पाकिस्तान की बदौलत हमेशा ही प्रसांगिक रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान आतंकवाद से होने वाली परेशानियों को लेकर कहा कि जैसा पड़ोसी हमारे बगल में बैठा है, भगवान ऐसा पड़ोसी किसी को न दें.

उन्होंने कहा, ‘सबसे बड़ी आशंका तो हमें हमारे पड़ोसी के बारे में रहती है. समस्‍या ये है आप दोस्‍त बदल सकते हैं पड़ोसी का चुनाव आपके हाथ में नहीं होता है. और जैसा पड़ोसी हमारे बगल में बैठा है, परमात्‍मा करे कि ऐसे पड़ोसी किसी को न मिले.’

ज़ाहिर है भारत के लिए आतंकवाद हमेशा से नासूर रहा हैं. आर्टिकल 370 में संशोधन को लेकर पेश किए गए बिल के दौरान भी गृह मंत्री अमित शाह ने यही कहा था कि इसे हटाए जाने से घाटी में आतंकवाद कम होगा.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू एवं कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने के प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों में पारित होने के बाद इसकी घोषणा कर दी है.

राष्ट्रपति भवन द्वारा मंगलवार रात जारी अधिसूचना में कहा गया, “समय-समय पर बिना रूप बदले और अपवादों के संशोधित किए गए भारतीय संविधान के सभी प्रावधान जम्मू एवं कश्मीर राज्य पर लागू होंगे, चाहे वे संविधान के अनुच्छेद 152 या अनुच्छेद 308 या जम्मू एवं कश्मीर के संविधान के किसी अन्य प्रावधान, या कानून, दस्तावेज, फैसला, अध्यादेश, आदेश, उपनियम, शासन, अधिनियम, अधिसूचना, रिवाज या भारतीय क्षेत्र में कानून या कोई अन्य साधन, संधि या अनुच्छेद 370 के अंतर्गत समझौता या अन्य तरह से दिया गया हो.”

अनुच्छेद 370 के कारण जम्मू एवं कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त था. अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए संयुक्त रूप से स्पष्ट करते थे कि राज्य के निवासी भारत के अन्य राज्यों के नागरिकों से अलग कानून में रहते हैं. इन नियमों में नागरिकता, संपत्ति का मालिकाना हक और मूल कर्तव्य थे. इस अनुच्छेद के कारण देश के अन्य राज्यों के नागरिकों के जम्मू एवं कश्मीर में संपत्ति खरीदने पर प्रतिबंध था.

केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में लिखा है, “अनुच्छेद 370 के खंड (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति संसद की अनुशंसा पर यह घोषणा करते हैं कि छह अगस्त से अनुच्छेद 370 के सभी खंड निष्क्रिय किए जाते हैं. अनुच्छेद 370 के खंड (3) में लिखा है कि राष्ट्रपति सार्वजनिक अधिसूचना के माध्यम से घोषित कर सकता है कि इस अनुच्छेद को निष्क्रिय किया जाएगा या निर्धारित अपवादों और बदले रूपों के साथ तय तारीख से लागू किया जाएगा.”

अनुच्छेद 370 को खत्म करने का प्रस्ताव लोकसभा ने मंगलवार को पारित किया. यह प्रस्ताव राज्यसभा में सोमवार को ही पारित किया जा चुका था.

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