राज्यसभा में इस तरह विपक्ष का हंगामा शर्मनाक, APMC और MSP नहीं होगा खत्म: राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने कहा कि ये दोनों विधेयक ऐतिहासिक हैं. किसानों का लाभ बढ़ेगा. किसानों के बीच गलतफहमी फैलाई जा रही है. न APMC और न ही MSP समाप्त हो रहा है. 

राज्यसभा में कृषि बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष के हंगामे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ और राज्यसभा में इस तरह का व्यवहार तो और भी ज्यादा शर्मनाक है.

दरअसल रविवार को राजनाथ सिंह सहित केंद्र सरकार के 6 मंत्रियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें रक्षा मंत्री ने किसानों को यह भी आश्वासन दिया कि APMC और MSP  प्रणाली खत्म नहीं होगी. इस दौरान उनके साथ केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत, पीयूष गोयल, प्रकाश जावड़ेकर, मुख्तार अब्बास नकवी और प्रह्लाद जोशी भी मौजूद रहे.

राजनाथ सिंह के संबोधन की मुख्य बातें:

  • आज राज्यसभा में कृषि से संबंधित 2 विधेयकों पर चर्चा चल रही थी उस समय राज्यसभा में जो हुआ वो जहां दुखद था, वहीं दुर्भाग्यपूर्ण था और उससे भी आगे जाकर मैं कहना चाहूंगा कि वो अत्यधिक शर्मनाक था.
  • विपक्ष से भी संसदीय मर्यादाओं का खयाल रखना अपेक्षित होता है. सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी तो होती है.
  • ये दोनों विधेयक ऐतिहासिक हैं. किसानों का लाभ बढ़ेगा. किसानों के बीच गलतफहमी फैलाई जा रही है. न APMC और न ही MSP समाप्त हो रही है.
  • ये दोनों विधेयक किसान और कृषि जगत के लिए ऐतिहासिक हैं. इससे किसानों की आय बढ़ेगी. परन्तु किसानों के बीच गलतफहमी पैदा की जा रही है कि MSP खत्म कर दी जाएगी जबकि ऐसा नहीं है किसी भी सूरत में MSP समाप्त नहीं होगा.
  • उपसभापति राज्यसभा के साथ जो दुर्व्यवहार हुआ पूरे देश ने देखा. हरिवश जी वैल्यू सिस्टम में विश्वास रखने वाले व्यक्ति हैं.
  • आसान पर चढ़ जाना, रूल बुक फाड़ देना. संसदीय इतिहास में ऐसी घटना न कभी लोकसभा में हुई और न ही राज्यसभा में. राज्यसभा में होना तो और बड़ी बात है. संसदीय परंपराओं में विश्वास रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की घटना से आहत होगा.
  • जो कुछ भी हुआ, वो संसदीय गरिमा के अनुरूप नहीं हुआ. संसदीय मर्यादाएं टूटती हैं, तो लोकतंत्र शर्मशार होता है. इसकी जितनी भर्त्सना हो कम है. इससे उनकी छवि को तो धक्का पहुंच ही, साथ ही लोकतंत्र की गरिमा को भी धक्का पहुंचा है.
  • विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर चेयरमैन को नोटिस दिया गया है. उनके द्वारा निर्णय लिया जाएगा. मैं राजनीतिक रूप से कुछ नहीं कहना चाहता. यह अध्यक्ष का विशेषाधिकार है.
  • ऐसे हर फैसले के पीछे कुछ न कुछ राजनीतिक कारण होते हैं. मैं इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता कि हरसिमरत कौर ने इस्तीफा देने का फैसला क्यों लिया.
  • मैं भी एक किसान हूं और मैं देश के किसानों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और कृषि उपज बाजार समिति (MSP) प्रणाली समाप्त नहीं होने जा रही है.

वहीं मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि जब उपसभापति बिल पारित करवा रहे थे, तब सभी विपक्षी सांसद सदन के वेल में आ गए थे, तो ऐसे में किसी संसदीय परंपरा की बात करना विपक्ष द्वारा बेमानी है. उपसभापति ने बार-बार कहा कि सभी सदस्य अपनी सीटों पर जाएं.

हंगामे के बीच दो कृषि बिल पास

मालूम हो कि राज्यसभा में विपक्ष के लगातार विरोध के बीच कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 और कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 ध्वनिमत से पारित हो गए.

उपसभापति का माइक भी तोड़ा

वहीं बिल पर चर्चा के दौरान बिल पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में हंगामा इतना बढ़ गया कि विपक्ष के राज्यसभा सांसद उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की कुर्सी के बगल तक आ गए. हंगामे के दौरान टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने उपसभापति के पास जाकर संसद की रूल बुक को फाड़ दिया और माइक छीनने की कोशिश भी की. वहीं AAP सांसद संजय सिंह ने माइक तोड़ दिया.

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