राज्‍यसभा में बोले राजनाथ सिंह- चीन की कथनी-करनी में फर्क, कड़े से कड़ा कदम उठाने के लिए हम तैयार

राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने कहा, "चीन के साथ रिश्‍ते बढ़ाए जा सकते हैं और सीमा विवाद पर भी साथ में बात हो सकती है लेकिन सीमा पर तनाव का असर रिश्‍तों पर पड़ेगा. चीन से सीमा का प्रश्न अब तक अनसुलझा है, अगर एलएसी पर तनाव रहा तो रिश्ते मधुर नहीं सकते."

Rajnath Singh Says, राज्‍यसभा में बोले राजनाथ सिंह- चीन की कथनी-करनी में फर्क, कड़े से कड़ा कदम उठाने के लिए हम तैयार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने भारत-चीन सीमा विवाद (India-China Border Dispute) को लेकर गुरुवार को राज्‍यसभा (Rajya Sabha) में जानकारी दी. उन्‍होंने कहा कि चीन ने लद्दाख में करीब 38 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन पर अवैध कब्‍जा कर रखा है. सिंह ने कहा कि चीन की गतिविधियों से साफ है कि उसकी कथनी और करनी में अंतर है. इसका सबूत ये है कि बातचीत के बावजूद चीन की तरफ से 29-30 अगस्‍त को भड़काने वाली कार्रवाई की गई.

राजनाथ सिंह ने कहा, “चीन के साथ रिश्‍ते बढ़ाए जा सकते हैं और सीमा विवाद पर भी साथ में बात हो सकती है लेकिन सीमा पर तनाव का असर रिश्‍तों पर पड़ेगा. चीन से सीमा का प्रश्न अब तक अनसुलझा है, अगर एलएसी पर तनाव रहा तो रिश्ते मधुर नहीं सकते.”

‘सेना का मनोबल बढ़ाने खुद लद्दाख गए पीएम’

रक्षा मंत्री ने कहा कि 15 जून को कर्नल संतोष बाबू ने अपने 19 बहादुर सैनिकों के साथ भारत की अखंडता को बचाने के उद्देश्य से गलवान घाटी में सर्वोच्च बलिदान दिया. हमारे पीएम खुद सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए लद्दाख गए.

राजनाथ सिंह ने कहा, “सीमा पर दोनों देशों के बीच शांति बहाल करने के लिए कई समझौते हुए, मगर चीन औपचारिक सीमाओं को नहीं मानता. सदन इस बात से अवगत है कि भारत और चीन सीमा का प्रश्न अभी तक अनसुलझा है. भारत और चीन की बाउंड्री का कस्टमरी और ट्रेडिशनल अलाइनमेंट चीन नहीं मानता है. यह सीमा रेखा अच्छे से स्थापित भौगोलिक सिद्धांतों पर आधारित है.”

‘भारत बातचीत का पक्षधर है लेकिन..’

रक्षा मंत्री ने राज्‍यसभा में साफ कर दिया कि ‘भारत बातचीत का पक्षधर है, मगर झुकने वालों में से नहीं है. चीन ने सीमा पर जवानों की भारी तैनाती की है और गोला-बारूद जुटाए हैं. भारतीय सेना ने भी काउंटर डिप्‍लॉयमेंट्स किए हैं. भारत की सुरक्षा के लिए चाहे जितना कड़ा कदम उठाना पड़े, हम उठाने को तैयार हैं.’

राजनाथ ने कहा, “चीन ने जो भी किया, वह द्विपक्षीय समझौतों का उल्‍लंघन है. चीन ने बॉर्डर पर सैनिक जुटाए जो कि 1993 और 1996 में हुए समझौतों के खिलाफ है. हमारी सेनाएं समझौतों का पूरी तरह पालन करती हैं लेकिन चीन की तरफ से ऐसा नहीं होता.”

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