मानसून सत्र: राज्यसभा में 25 विधेयक पारित, सभापति वेंकैया नायडू ने सदन में हुईं घटनाओं पर जताई नाराजगी

कुछ राज्यसभा सदस्यों के आचरण पर चिंता जताते हुए सभापति नायडू ने इसे ‘अति पीड़ादायक’ बताया और कहा कि सभी को इन मुद्दों पर सामूहिक रूप से विचार मंथन करना चाहिए.

  • TV9 Digital
  • Publish Date - 7:43 pm, Wed, 23 September 20

कोरोनावायरस महामारी के बीच शुरू हुआ राज्यसभा का मानसून सत्र बुधवार को अपने निर्धारित समय से करीब आठ दिन पहले अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया है. इस मानसून सत्र में 25 विधेयकों को पास किया गया. राज्यसभा में आज 8 विधेयक पारित किए गए. विपक्ष द्वारा राज्यसभा की कार्यवाही का बहिष्कार वाले फैसले के बाद सदन में दो दिन के अंदर 15 विधेयक पारित हुए. इसमें मंगलवार को 7 और आज 8 विधेयक पारित हुए.

राज्यसभा के सभापति नायडू ने कहा कि राज्यसभा के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि उपसभापति को हटाये जाने का नोटिस दिया गया. सभापति ने कहा कि उन्होंने इसे खारिज कर दिया क्योंकि वह नियमों के अनुरूप नहीं था. उन्होंने इसके बाद सदन में हुई घटनाओं को ”पीड़ादायक” बताया. उन्होंने सदन में अनुपस्थित सदस्यों से अनुरोध किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं हो और सदन की गरिमा बनी रहे.

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने विपक्ष के कुछ सदस्यों द्वारा सदन का बहिष्कार किए जाने के बीच विधेयकों को पारित किए जाने के दौरान कहा कि यदि इस परिस्थिति में विधायी कार्य को नहीं लिया जाता तो इस तरह के बहिष्कार को विधायी कामकाज को बाधित करने के प्रभावी माध्यम के रूप से जायज ठहराया जा सकता था.

बता दें कि रविवार को कृषि संबंधी दो विधेयकों के पारित होने के दौरान हंगामे को लेकर सोमवार को आठ विपक्षी सदस्यों को निलंबित कर दिया गया था. निलंबित किए गए सदस्यों में तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन, कांग्रेस के राजीव सातव, सैयद नजीर हुसैन और रिपुन बोरा, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, सीपीएम के केके रागेश और इलामारम करीम शामिल थे.

इसी के चलते कांग्रेस, वाम दलों, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सहित विपक्ष के कई दलों ने आठ सदस्यों को निलंबित करने के निर्णय के विरोध में सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया था.