सरकार ने दी मंजूरी तो कोरोना काल में ऐसे होगी दिल्ली में रामलीला, मास्क पहने नज़र आएंगे भगवान राम

हर साल लगभग 700 रामलीलाएं शहर भर में आयोजित की जाती है, जिनमें से सौ सबसे पुरानी और लोकप्रिय हैं. आमतौर पर हर साल बड़ी और छोटी रामलीलाओं की तैयारी इस वक्त तक शुरू हो जाती थी.

कोरोना (Corona) महामारी के बीच रामलीला मंचन को लेकर बड़ी तैयारी की जा रही हैं. सरकार की तरफ से मंजूरी मिलती है तो भगवान राम मास्क में नज़र आ सकते हैं. वहीं रावण से उनकी लड़ाई में कम योद्धा शामिल होंगे. उनकी लड़ाई ऐसी होगी कि एक-दूसरे का आपस में संपर्क न हो.

दर्शकों की संख्या को हज़ारों से घटाकर कुछ सौ तक सीमित किया जा सकता है. मंच पर होने वाले बदलावों में कलाकारों को बड़ी संख्या में घटाना तक शामिल है. खासतौर पर राम और रावण दोनों की सेना में. देवी सीता के अपहरण के मंचन को भी संपर्क रहित दर्शाया जा सकता है. जिसमें कॉलर माइक और स्मोक गन से वास्तविकता दिखाने की कोशिश की जाएगी. आयोजक कोविड 19 के दौर में संपर्क मुक्त रामलीला के मंचन की योजना बना रहे हैं.

इस साल क्या हो सकता है खास

अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन जिसमें खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे के बाद से इस बार की रामलीला और भी महत्वपूर्ण नज़र आती है. दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता रामवीर बिधूड़ी ने कहा कि उम्मीद है कि इस मामले पर केंद्र सरकार दिशा-निर्देशों को लेकर सकारात्मक निर्णय देगी. सोमवार को बिधूड़ी और दिल्ली धर्म संघ के महासचिव अशोक गोयल देवराह ने केंद्रीय गृहराज्य मंत्री जी किसन रेड्डी से अनुरोध किया कि रामलीला मंचन को अनुमित दी जानी चाहिए. दिल्ली धर्म संघ शहर में रामलीला मंचन के कार्यक्रमों का आयोजन करता है.

शहर में हर साल होती हैं 700 राम लीलाएं

गोयल के मुताबिक हर साल लगभग 700 रामलीलाएं शहर भर में आयोजित की जाती है, जिनमें से सौ सबसे पुरानी और लोकप्रिय हैं. आमतौर पर हर साल बड़ी और छोटी रामलीलाओं की तैयारी इस वक्त तक शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार महामारी को देखते हुए ऐसा नहीं हो सका. उन्होंने कहा, “आयोजन समितियों और दिल्ली धर्मिक संघ के बीच कई दौर की चर्चा हुई है कि इस वर्ष के कार्यक्रमों का आयोजन कैसे किया जाना चाहिए. रामलीला आयोजनों में दर्शकों को 500 तक सीमित किया जा सकता है. साथ ही एंट्री और एग्जिट पर सैनिटाइजेशन की व्यवस्था भी की जाएगी. मास्क, मंच और मंच के नीचे अनिवार्य होगा.

बिना संपर्क के राम-रावण की लड़ाई

इसी तरह हम मंच पर कलाकारों की संख्या को सीमित कर देंगे. उदाहरण के तौर पर दोनों सेनाएं छोटी कर दी जाएंगी. युद्ध के दृश्यों के दौरान भी कोई संपर्क नहीं होगा. कॉलर माइक अनिवार्य किए जाएंगे. संघर्ष को ऑडियो के आधार पर दिखाने पर फोकस किया जाएगा, जैसे फिल्मों में साउंड इफेक्ट के ज़रिए होता था. साथ ही हैंडहेल्ड स्मोक गन की प्रभावशीलता का इस्तेमाल किया जाएगा.

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