रमा देवी के संघर्ष की दास्तान, जब श्रीप्रकाश शुक्ला ने पति को AK-47 से किया था छलनी

घर की रसोई से निकल कर स्पीकर की कुर्सी पर काबिज होने वाली रमा देवी का सफर राजनैतिक संघर्ष की एक कहानी है.
rama devi profile azam khan, रमा देवी के संघर्ष की दास्तान, जब श्रीप्रकाश शुक्ला ने पति को AK-47 से किया था छलनी

रमा देवी पर अभद्र टिप्पणी कर आजम खान बुरी तरह फंस गए हैं. दलगत भावना से ऊपर उठ कर हर पार्टी उनके खिलाफ है. कई महिला सांसदों ने यहां तक कह दिया कि आजम खान (Azam Khan) सदन में बर्दाश्त करने लायक नहीं हैं. खुद रमा देवी (Rama Devi) भी आजम खान की टिप्पणी से आहत हैं. उन्होंने कहा .. ये महिलाओं को कैसे देखता है ये जगजाहिर है. रमा देवी स्पीकर की कुर्सी पर बैठी थीं जब आजम खान ने वाहियात शेर पढ़ते हुए अपनी तकरीर की शुरुआत की.

रमा देवी ने ये मुकाम जाती जिंदगी में कड़े संघर्ष के बाद हासिल की है. वो शिवहर से भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janata Party) की सांसद हैं. लगातार तीसरी बार जनता ने उन्हें जिताया है. रमा देवी का घर बिहार के मुजफ्फरपुर शहर में ब्रह्मपुरा चौक के पास है. मुजफ्फरपुर से ही लॉ की पढ़ाई करने के बाद 1998 तक वो आम गृहणी की जिंदगी जी रही थीं.

रमा देवी के पति बृज बिहारी प्रसाद उस समय बिहार सरकार में साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्टर थे. उनकी छवि एक बाहुबली बनिया नेता की थी. उन पर इंजीनियरिंग कॉलेजों में फर्जीवाड़े से एडमिशन कराने के आरोप लगे थे. पर मुजफ्फरपुर की सियासी जमीन पर उन्हें छोटन शुक्ला से चुनौती मिल रही थी. छोटन शुक्ला दबंग भूमिहार जाति से थे. उन्हें मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) के विधायक रघुनाथ पांडेय की शह मिली हुई थी जिसे पूरा शहर ‘बाबा’ के नाम से जानता था.

जब एके-47 से रमा देवी के पति बृजबिहारी का हुआ मर्डर

लेकिन चार दिसंबर, 1994 को छोटन शुक्ला की हत्या कर दी गई. ये वो दौर था जब बिहार की राजनीति अगड़े-पिछड़े की लड़ाई की आग में जल रही थी. कहीं न कहीं इस मर्डर में बृज बिहारी प्रसाद का हाथ होने की बात कही गई. जल्दी ही बदला लेने की बात फिजा में तैरने लगी. 1998 में एडमिशन घोटाले में बृज बिहारी प्रसाद अरेस्ट हो गए. उन्होंने सीने में दर्द की बात कही. पुलिस ने पटना के इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में उन्हें भर्ती करा दिया.

अस्पताल में भी बृज बिहारी की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे क्योंकि वो लालू यादव के बेहद करीबी माने जाते थे. लेकिन छोटन शुक्ला मर्डरकांड के बदले की आग ठंडी नहीं हुई थी. 13 जून, 1998 को अस्पताल परिसर में ही यूपी के डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला ने एके-47 से उन्हें छलनी कर दिया.

हालांकि गिरफ्तारी के बाद ही आऱजेडी ने बृजबिहारी की पत्नी रमा देवी को मोतिहारी से लोकसभा का टिकट दिया और वो 1998 में 12वीं लोकसभा के लिए जीत भी गईं. लेकिन ये सच्चाई किसी से परे नहीं थी कि रमा देवी के आंख और कान बृजबिहारी प्रसाद ही थे.

पति की हत्या के बाद रमा देवी ने मजबूती से अपने को संभाला. संघर्ष करते हुए राजनीतिक जमीन तैयार की. इस बीच 2005 में बिहार से लालू का सफाया हो गया. मौके की नजाकत को समझते हुए रमा देवी ने भाजपा का दामन थाम लिया और 2009 में वो पार्टी के टिकट पर लोकसभा पहुंच गईं.

उसके बाद लगातार तीसरी बार वो इस साल सांसद बनी हैं और उत्तर बिहार में बीजेपी के ओबीसी प्लान का एक अहम हिस्सा बन कर उभरी हैं.

Related Posts