740 करोड़ के धोखधड़ी मामले में गिरफ्तार हुए रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह

दिसंबर 2018 में, रेलिगेयर फिनवेस्ट ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में 740 करोड़ की ठगी की शिकायत दी थी.

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने गुरुवार को रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह, सुनील गोडवानी, कवि अरोड़ा और अनिल सक्सेना को 740 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार कर लिया है. दिसंबर 2018 में, रेलिगेयर फिनवेस्ट ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में 740 करोड़ की ठगी की शिकायत दी थी.

इसी के साथ मामले में नामजद किए गए शिवेंद्र सिंह के बड़े भाई मालविंदर सिंह के लिए भी लुकआउट नोटिस जारी किया गया है. दोनों भाइयों पर अगस्त महीने में प्रवर्तन निदेशालय ने छापा मारा था. रेलिगेयर फिनवेस्ट ने दिसंबर में सिंह बंधुओं के खिलाफ पुलिस में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी. पांच महीने बाद, दोनों भाइयों पर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया.

शिविंदर सिंह और मालविंदर सिंह अपने पिता द्वारा स्थापित मल्टी बिलियन डॉलर की रैनबैक्सी लेबोरेटरीज के उत्तराधिकारी थे. उन्होंने 2008 में इसे जापानी फर्म दाइची सांक्यो को बेच दिया और परिवार के स्वामित्व वाली फोर्टिस हेल्थकेयर, अस्पतालों की सीरीज और एक वित्तीय सेवा फर्म रेलिगेयर एंटरप्राइजेज पर ध्यान केंद्रित किया.

कोर्ट ने सिंह बंधुओं को दिया था भुगतान करने का निर्देश

2013 में, दाइची ने सिंगापुर में एक मध्यस्थता न्यायाधिकरण से शिकायत की, जिसमें आरोप लगाया गया कि दोनों भाइयों ने रैनबैक्सी को बेचते समय, अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन और न्याय विभाग के बारे में जानकारी छुपा कर रखी थीं. 2016 में न्यायाधिकरण ने सिंह को दाइची को 2,562 करोड़ रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया. भाइयों ने फैसले को चुनौती दी लेकिन 2017 में, दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें भुगतान करने का आदेश दिया.

इसके बाद दोनों भाइयों के बीच झगड़ा शुरू हो गया. उन्होंने फरवरी 2018 में हाई कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद फोर्टिस हेल्थकेयर के बोर्ड से निदेशक के रूप में इस्तीफा दे दिया. उसी साल सितंबर में, शिविंदर सिंह ने अपने भाई के खिलाफ उनके संयुक्त व्यवसायों में “उत्पीड़न और कुप्रबंधन” का आरोप लगाते हुए एक मामला दायर किया.

हालांकि जांच में सामने आया कि उन्होंने फोर्टिस से फंड डायवर्ट किया और वित्तीय लेन-देन को गलत तरीके से पेश किया. इसके बाद SEBI ने सिंह और उनसे जुड़ी फर्मों को आदेश दिया कि फोर्टिस को 403 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाए. पिछले साल, सुप्रीम कोर्ट ने भी सिंह भाइयों की अपील को खारिज कर दिया था.

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