व्यंग्‍य: पुतला दहन के लिए तैयार थी दशहरा समिति, पहले ही किसी ने लगा दी आग, अब दूसरे रावण की तलाश

समिति वाले अब रावण दहन के लिए दूसरा रावण अरेंज कर रहे हैं.
Dussehra Ravan Dahan 2019, व्यंग्‍य: पुतला दहन के लिए तैयार थी दशहरा समिति, पहले ही किसी ने लगा दी आग, अब दूसरे रावण की तलाश

Dussehra Ravan Dahan 2019: हरियाणा के गुरुग्राम में एक दशहरा समिति शाम में पुतला दहन की पूरी तैयारी कर चुकी थी. स्टेडियम पूरी तरह से तैयार किया जा चुका था. महीनों की मेहनत के बाद रावण का पुतला तैयार किया गया था. समिति वाले गेस्ट अरेंज कर रहे थे. वीआईपी गेस्ट कौन होंगे, वीवीआईपी कौन? तभी कुछ जलने की बू आई.

पहला व्यक्ति- क्या जल रहा है भाई?
दूसरा व्यक्ति- लगता है कहीं कोई लकड़ी या कागज जल रहा है.

तभी अचानक से पटाख़े फूटने की आवाज़ आई.

पहला व्यक्ति- सुबह-सुबह पटाख़े क्यों फोड़े जा रहे हैं.

इतनी ही देर में ताबड़तोड़ पटाख़े फूटने की आवाज़ आने लगी. दोनों व्यक्ति बाहर कमरे से बाहर निकले.

पहला व्यक्ति- अरे ये क्या? रावण में किसने आग लगा दी.. हाय राम, फंस गया. अब क्या होगा. समिति वालों को क्या जवाब दूंगा. अरे किसको फोन लगाऊं.
दूसरा व्यक्ति- सर, फायर ब्रिगेड वालों को बुलाते हैं.

पहला व्यक्ति- सत्यानाश जाए तेरा. अरे जब तक वे लोग आएंगे, रावण साहब स्वाहा हो चुके होंगे.
दूसरा व्यक्ति- फिर क्या करें? मगर आग किसने लगाई होगी?

पहला व्यक्ति- पुतले के पास चलो.

दोनों भागकर पुतले के पास पहुंचे. कुछ शरारती तत्व वहां आग लगा रहे थे. फिर क्या था दोनों ने खदेड़ना शुरू किया. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. सभी मौक़े से फ़रार हो गए. ठीक वैसे ही जैसे पुलिस छापेमारी के लिए पहुंचती है और आरोपी फरार.

पहला व्यक्ति- अब क्या करें, समझ नहीं आ रहा है?
दूसरा व्यक्ति- मैनेजर साहब को फोन करूं क्या?

पहला व्यक्ति- अरे जान ले लेंगे वो?
दूसरा व्यक्ति- लेकिन अब रास्ता भी क्या बचा है?

पहला व्यक्ति- ठीक ही कह रहे हो. लगाओ फोन अब तो राम ही उस रावण से बचाएं.

दूसरे व्यक्ति ने फोन लगाया. घंटी बजने की आवाज़ आई. मैनेजर साहब ने फोन उठाया.

मैनेजर की आवाज़ आई- हां मनसुख बताओ?
दूसरा व्यक्ति- मैनेजर साहब, ये गुमनामी बाबा आपसे बात करेंगे.

पहला व्यक्ति फोन लेता है. हकलाते हुए मैनेजेर साहब से कहता है. साहब जी वो रावण का तो हो गया..
मैनेजर साहब– रे रावण का क्या हो गो?

पहला व्यक्ति- साहब रावण को आग लगा दी.
मैनेजर साहब- रे वो तो शाम में कलेक्टर साहब लगाएंगे न? तू जल्दी-जल्दी सारा काम निबटा.

पहला व्यक्ति- साहब आप समझे नहीं, रावण का राम नाम सत्य हो गया.
मैनेजार साहब- रावण का राम नाम सत हो गो? रे कहना का चाहे है तू? रे मति फिर गो के.

पहला व्यक्ति- सर, वो कुछ लौंडे थे जिन्होंने रावण के पुतले में चुपके से आग लगा दी.
मैनेजर साहब गला फाड़ते हुए बोले- रे रावण में न, मुझमें आग लगा दी तने. रे कलेक्टर साहब को का बोलूंगा मैं. ले नेताजी का भी फोन आ रहो है. देख गुमनामी कुछ भी कर मुझे रावण जिंदो चाहों. फिर तन्ने लंका ही क्यों न जाने पड़ेगो.

पहला व्यक्ति- सर मैं इतनी जल्दी इतना बड़ा रावण कहां से ले कर आऊं?
मैनेजर साहब- रे सकूटर से जा और कहीं से भी लेकर आ. मन्ने कुछ न पता. ये कहते हुए मैनेजेर ने फोन काट दिया.

तभी सो गुमनामी और मनसुख दोनों रावण की तलाश में सड़क पर घूम रहे हैं.

दशहरे से पहले रावण जलाए जाने की यह घटना सच्ची है. गुरुग्राम में कुछ शरारती तत्वों ने दशहरा समिति के रावण का पुतला पहले ही जला दिया. इस घटना को बयान करने के लिए काल्पनिक किरदार लिए गए हैं.

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