‘कई बार मैंने अकेले ही लड़ाई लड़ी,’ पढ़ें दर्द बयां करती राहुल गांधी की पूरी चिट्ठी

राहुल गांधी ने अपने इस्तीफे में लिखा, "मैं एक कांग्रेसी पैदा हुआ था, यह पार्टी हमेशा मेरे साथ रही है और लहू के हर एक कतरे की तरह मेरे जीवन का अमिट हिस्सा है और हमेशा रहेगी."

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया और पार्टी से नया अध्यक्ष नियुक्त करने के लिए अनुरोध किया. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए राहुल नतीजों के ऐलान के बाद से ही इस जिद पर डटे थे. उन्होंने इस्तीफे की चिट्ठी को ट्विटर पर भी शेयर की. पढे़ं उनकी पूरी चिट्ठी.

“राहुल गांधी की चिट्ठी”

”कांग्रेस पार्टी की सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात है, जिसके आदर्शों और मूल्यों ने हमारे सुंदर राष्ट्र की जीवनदायिनी के रूप में सेवा की है. मैं कृतज्ञता और असीम प्यार के लिए देश और अपने संगठन का कर्जदार रहूंगा.

कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के रूप में, मैं 2019 के चुनाव में मिली हार की जिम्मेदारी लेता हूं. हमारी पार्टी के बेहतर भविष्य के विकास के लिए जवाबदेही महत्वपूर्ण है. यही कारण है कि मैंने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. पार्टी के पुनर्निर्माण के लिए कठोर निर्णय लेने की आवश्यकता है और कई लोगों को 2019 की विफलता के लिए जवाबदेह बनना होगा.

पार्टी अध्यक्ष के रूप में मेरी अपनी जिम्मेदारी को अनदेखा करके दूसरों को जवाबदेह ठहराना अन्याय होगा. मेरे कई साथियों ने मुझे सुझाव दिया कि मैं अगले कांग्रेस अध्यक्ष को मनोनीत करूं. हालांकि किसी नए व्यक्ति के लिए हमारी पार्टी का नेतृत्व करना महत्वपूर्ण है, लेकिन मेरा उस व्यक्ति का चयन करना सही नहीं होगा.

हमारी पार्टी समृद्ध इतिहास और विरासत के साथ संघर्ष और सम्मान का एक ऐसा दल है, जिसका मैं गहराई से सम्मान करता हूं. इसे भारत के ताने-बाने में बुना गया है और मुझे विश्वास है कि पार्टी इस बारे में सबसे अच्छा निर्णय लेगी कि कौन हमें साहस, प्रेम और निष्ठा के साथ आगे बढ़ा सकता है.

इस्तीफा देने के तुरंत बाद, मैंने कांग्रेस कार्य समिति में अपने सहयोगियों को सुझाव दिया कि आगे एक नए अध्यक्ष की तलाश शुरू करने का काम एक समूह को सौंपा जाए. मैंने उन्हें ऐसा करने के लिए सशक्त किया है और इस प्रक्रिया और एक परिवर्तन के लिए अपना पूरा समर्थन भी दिया है.

मेरा संघर्ष कभी भी राजनीतिक सत्ता के लिए साधारण लड़ाई नहीं रहा. मुझे बीजेपी के प्रति कोई घृणा या क्रोध नहीं है, लेकिन मेरे शरीर में मौजूद ख़ून की हर बूंद सहज रूप से भारत के उनके विचार का प्रतिरोध करती है. यह प्रतिरोध इसलिए पैदा होता है, क्योंकि मेरे होने की अनुमति एक भारतीय विचार से मिलती है और जो हमेशा उनके साथ सीधे टकराव में रहा है. यह कोई नई लड़ाई नहीं है. यह हजारों वर्षों से हमारी धरती पर छाई हुई है. जहां वे मतभेद देखते हैं, मैं समानता देखता हूं. जहां वे घृणा से देखते हैं, मैं प्रेम से देखता हूं. जहां वे डरते हैं, मैं गले लगाता हूं.

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यह करुणापूर्ण विचार मेरे प्रिय साथी नागरिकों के लाखों-करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करता है. यह भारत का विचार है जिसकी हम रक्षा करेंगे. हमारे देश और हमारे पोषित संविधान पर हमला हमारे देश के ताने-बाने को नष्ट करने के लिए बनाया गया है. किसी भी तरह से मैं इस लड़ाई से पीछे नहीं हट रहा हूं. मैं कांग्रेस पार्टी का एक निष्ठावान सिपाही और भारत का एक समर्पित बेटा हूं और अपनी अंतिम सांस तक उनकी सेवा और सुरक्षा करता रहूंगा.

हमने एक मजबूती से चुनाव लड़ा. हमारा अभियान भारत के सभी लोगों, धर्मों और समुदायों के लिए भाईचारे, सहिष्णुता और सम्मान में से एक था. मैंने व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री, आरएसएस और उन सभी संस्थानों से लड़ाई लड़ी है, जिन पर उन्होंने कब्जा कर रखा है.

मैंने संघर्ष किया क्योंकि मैं भारत से प्यार करता हूं और भारत ने जिन आदर्शों का निर्माण किया था, उनकी रक्षा के लिए मैंने संघर्ष किया. कई बार, मैं पूरी तरह से अकेला खड़ा था और मुझे इस पर बहुत गर्व है. मैंने अपने कार्यकर्ताओं और पार्टी के सदस्यों, पुरुषों और महिलाओं की भावना और समर्पण से बहुत कुछ सीखा है, जिन्होंने मुझे प्यार और शालीनता के बारे में सिखाया है.

एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए किसी भी देश के संस्थानों की निष्पक्षता भी जरूरी होती है. एक चुनाव बिना मध्यस्थों के निष्पक्ष हो ही नहीं सकता. एक स्वतंत्र प्रेस, एक स्वतंत्र न्यायपालिका और एक पारदर्शी चुनाव आयोग जो तटस्थ हो. 2019 के चुनाव में हमारी लड़ाई एक राजनीतिक पार्टी से नहीं थी. बल्कि, हमने पूरी सरकारी मशीनरी से लड़ाई लड़ी, जिसका हर संस्थान विपक्ष के खिलाफ था. अब यह स्पष्ट हो गया है कि हमारी संस्थागत तटस्थता अब अस्तित्व में नहीं है.

हमारे देश की संस्थागत संरचना पर कब्जा करने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के घोषित उद्देश्य अब पूरे हो गए हैं. हमारा लोकतंत्र बुनियादी रूप से कमजोर हुआ है. एक वास्तविक खतरा यह है कि अब से, चुनाव भारत के भविष्य को तय करने के बजाय औपचारिकता मात्र रह जाएंगे.

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सत्ता पर कब्जा करने से भारत के लिए अकल्पनीय स्तर की हिंसा और दर्द होगा. किसानों, बेरोजगार युवाओं, महिलाओं, आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है. हमारी अर्थव्यवस्था और राष्ट्र की प्रतिष्ठा पर प्रभाव विनाशकारी होगा. प्रधानमंत्री की जीत उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की गंभीरता को कम नहीं करती है. कोई भी धन राशि और प्रचार कभी भी सच्चाई की रोशनी को छिपा नहीं सकता है.

भारत को अपनी संस्थाओं को पुनर्जीवित करने के लिए एकजुट होना चाहिए. इस पुनर्जीवन का माध्यम कांग्रेस पार्टी होगी. इस महत्वपूर्ण लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, कांग्रेस पार्टी को खुद को मौलिक रूप से बदलना होगा. आज बीजेपी भारतीयों की आवाज को व्यवस्थित रूप से कुचल रही है. इन आवाजों का बचाव करना कांग्रेस पार्टी का कर्तव्य है. भारत कभी भी एक आवाज नहीं रहा है. यह हमेशा आवाजों का एक समूह रहा है. यही भारत माता का सच्चा सार है.

देश और विदेश में, उन हजारों भारतीयों को धन्यवाद, जिन्होंने मुझे पत्र और समर्थन के संदेश भेजे हैं. मैं अपनी पूरी ताकत से कांग्रेस पार्टी के आदर्शों के लिए लड़ता रहूंगा. जब भी उन्हें मेरी सेवाओं या सुझाव की आवश्यकता होगी, मैं पार्टी के लिए उपलब्ध हूं. जो लोग कांग्रेस की विचारधारा का समर्थन करते हैं, विशेष रूप से हमारे समर्पित और प्यारे कार्यकर्ताओं के लिए, मुझे अपने भविष्य और आपके प्रति अत्यंत प्रेम पर पूर्ण विश्वास है.

भारत में एक आदत है कि कोई भी शक्तिशाली सत्ता से चिपका रहता है, सत्ता का बलिदान नहीं करता. लेकिन हम एक गहरी वैचारिक लड़ाई और सत्ता की इच्छा का त्याग किए बिना अपने विरोधियों को परास्त नहीं कर पाएंगे. मैं एक कांग्रेसी पैदा हुआ था, यह पार्टी हमेशा मेरे साथ रही है और लहू के हर एक कतरे की तरह मेरे जीवन का अमिट हिस्सा है और हमेशा रहेगी.”

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