हरियाणा सरकार में शामिल जेजेपी में क्यों सब कुछ ठीक नहीं , गौतम के बाद देवेंद्र बबली भी हैं नाराज

दुष्यंत (dushyant chautala ) के पास करीब 11 विभाग हैं. मंत्रीमंडल के गठन के बाद दुष्यंत ने सारे विभाग अपने पास रख लिए और एक मात्र विधायक अनूप धानक को मंत्री बनाया. किसी जाट को मंत्री नहीं दिया गया. इसका मतलब यह निकाला जा रहा है कि दुष्यंत अपने अलावा किसी अन्य को जाट नेता के तौर पर उभरते नहीं देखना चाहते हैं.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 2:08 pm, Fri, 18 September 20

जननायक जनता पार्टी में कलह बढ़ता जा रहा है. टोहाना के जेजेपी विधायक देवेंद्र बबली ने अब पार्टी अध्यक्ष और प्रदेश के डिप्टी सीएम के खिलाफ मोर्चा खोल लिया है. नारनौद से जेजेपी विधायक राजकुमार गौतम पहले ही अपने नेता के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं. गठबंधन पर आधारित सरकारों में शामिल दलों के साथ ये सब कोई नई बात नहीं है. विधायक अपने नेता पर दबाव बनाते रहते हैं और इस क्रम में कई बार पार्टियां टूटने की ओर बढ़ती हैं. पर यह बिना विरोधी पार्टियों की शह पर सफल नहीं होता. जेजेपी के साथ अभी कुछ ऐसा नहीं है यही कारण जिसके चलते पार्टी को चिंता करने की जरूरत है। बिना किसी बाहरी कारकों के अगर घर में विद्रोह की स्थित पैदा होती है तो इसका मतलब है नेतृत्व कमजोर पड़ रहा है. देखते हैं ऐसा क्यों हो रहा है.

1- मंत्रीमंडल के 11 विभाग दुष्यंत चौटाला के पास

हरियाणा में पिछले विधानसभा चुनावों में पार्टी को 10 सीटें मिलीं. नवगठित पार्टी के हिसाब से यह ठीक प्रदर्शन था. पर बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने वाली बात हो गई. बीजेपी को बहुमत से कम सीटें मिलीं और जेजेपी की लाटरी निकल गई.  कुछ राष्ट्रीय घटनाक्रमों के चलते बीजेपी भी तोड़ फोड़ के मूड में नहीं थी. अन्यथा बीजेपी कुछ निर्दलीयों और जेजेपी में तोड़फोड़ करे सरकार बना सकती थी पर ऐसा नहीं हुआ और दुष्यंत की किस्मत चमक गई.  सरकार में दुष्यंत चौटाला को न केवल डिप्टी सीएम का पद मिला बल्कि कई मलाईदार विभाग भी मिल गए . दुष्यंत के पास करीब 11 विभाग हैं पर उन्होंने एक भी मलाईदार विभाग किसी को नहीं दिया . मंत्रीमंडल के गठन के बाद दुष्यंत ने सारे विभाग अपने पास रख लिए और एक मात्र विधायक अनूप धानक को मंत्री बनाया. किसी जाट को पद नहीं दिया गया इसका मतलब यह निकाला गया कि दुष्यंत अपने अलावा किसी अन्य को जाट नेता के तौर पर उभरते नहीं देखना चाहते हैं. यही आरोप नारनौंद से वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यू को चुनाव में हराने वाले रामकुमार गौतम ने पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद छोड़ते हुए लगाया था. दुष्यंत पार्टी के कोटे से एक मंत्री पद और ले सकते थे, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया. इसको लेकर जेजेपी विधायकों को ऐसा लगता है कि दुष्यंत अकेले राज करना चाहते हैं. बुधवार को जेजेपी विधायक देवेंद्र बबली ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कुछ ऐसी ही बातें बोलीं थीं.

2-भ्रष्टाचार के केस
संयोग से सरकार बनने के बाद भ्रष्टाचार के जितने भी केस सामने आए हैं वो सभी विभाग दुष्यंत चौटाला के पास ही हैं. रजिस्ट्री घोटाला, शराब घोटाला, धान घोटाला आदि के चलते सरकार की छवि ही नहीं दुष्यंत चौटाला की छवि को भी नुकसान हुआ है. पार्टी की अलोकप्रियता को देख कुछ और विधायक भी सामने आते हैं तो उनको रोकना मुश्किल हो जाएगा. साथी दल बीजेपी और मुख्य विपक्ष कांग्रेस दोनों ही जननायक जनता पार्टी का काम खराब करने में देर नहीं करेंगे. सरकार की सबसे पार्टी भारतीय जनता पार्टी कभी भी छवि खराब होने के नाम पर इन विधायकों को मिलाकर सत्ता का गणित अपने ओर करके आत्मनिर्भर सरकार की सरकार की ओर बढ़ सकती है.

3- फिलहाल दल बदल कानून के चलते सुरक्षित हैं दुष्यंत

पार्टी के कुल 10 विधायक हैं इसलिए दल बदलने के लिए कुल 7 विधायकों की जरूरत होगी. 2 विधायक तो पार्टी अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं,असंतोष कुछ और लोगों में है पर वो सामने इसलिए नहीं आ रहे हैं क्यों कि दलबदल कानून के हिसाब से 7 का आंकड़ा अभी भी मुश्किल लग रहा है. पर राजनीति की दुनिया में खेल
बदलते देर नहीं लगती. देवेंद्र बबली ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि एक ही आदमी पावर यूज करें और दबाव की राजनीति करें ये ये हरियाणा में चलने वाली नहीं है। दुष्यंत हमारी वजह से विधायक दल के नेता है जिसें सब मिलकर बदल भी सकतें है.