राफेल पर ॐ को ड्रामा बताने वाले INS अरिहंत पर नारियल फोड़ा करते थे

विपक्ष ने राफेल की पूजा को ड्रामा बताया और देखते ही देखते ही तर्क आने लगे कि सेक्‍युलर देश में राफेल पर ॐ क्‍यों लिखा गया?

नई दिल्‍ली: विजयदशमी के दिन मंगलवार को फ्रांस में भारतीय वायुसेना को पहला राफेल मिल गया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले राफेल को रिसीव करने खुद फ्रांस पहुंचे, जहां उन्‍होंने पूरे विधि-विधान के साथ शस्‍त्र पूजन किया. भारतीय वायुसेना के पास आधुनिक लड़ाकू विमानों की सालों से कमी महसूस हो रही थी, ऐसे में राफेल का मिलना निश्चित तौर पर एक अच्‍छी खबर है, लेकिन इस मुद्दे पर देश में एक अलग ही डिबेट शुरू हो गई है.

विपक्ष ने राफेल की पूजा को ड्रामा बताया और देखते ही देखते ही तर्क आने लगे कि सेक्‍युलर देश में राफेल पर ॐ क्‍यों लिखा गया. कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि बीजेपी की दिक्‍कत यही है, ये लोग नाटक ज्‍यादा करते हैं. कांग्रेस की तरफ से बयान आते ही सोशल मीडिया पर मीम बनने शुरू हो गए. किसी ने राफेल के नीचे रखे नींबू के मीम बनाए तो कोई नारियल की तस्‍वीरें शेयर कर रहा है. कांग्रेस समर्थक राफेल की पूजा को सेक्‍युलरिज्‍म के लिए खतरा बता रहे हैं.

ऐसे में कई सवाल उठते हैं. सबसे पहले तो यह जानना जरूरी है कि इस तरह मामलों में कांग्रेस का अपना रुख क्‍या रहा है? दूसरा महत्‍वपूर्ण सवाल यह है कि क्‍या वाकई मोदी सरकार सिर्फ हिंदुत्‍व की परंपराओं को ही निभा रही है? तीसरा और सबसे ज्‍यादा गौर करने वाला सवाल यह है कि क्‍या वाकई राफेल पर ॐ लिखने से भारत का सेक्‍युलरिज्‍म खतरे में पड़ जाता है?

इन तीनों सवालों के जवाब हमें इन तीन तस्‍वीरों से मिलते हैं.

नारियल, ॐ, नींबू और राफेल, राफेल पर ॐ को ड्रामा बताने वाले INS अरिहंत पर नारियल फोड़ा करते थे

सबसे पहले बात करते हैं कि आखिर कांग्रेस की खुद की सोच इस तरह के मामलों में कैसी रही है. यह तस्‍वीर है 26 जुलाई 2009 की. उस वक्‍त पीएम मनमोहन सिंह थे और INS अरिहंत का उद्घाटन किया गया था. वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता और तत्‍कालीन पीएम मनामोहन सिंह की पत्‍नी गुरशरन कौर ने INS अरिहंत का उद्घाटन नारियल फोड़कर किया था. तो कांग्रेस की सरकार में, कांग्रेस के पीएम ने हिंदू परंपरा का पालन क्‍यों किया? कांग्रेस के संदीप दीक्षित और अन्‍य नेता बताएं कि नारियल क्‍यों फोड़ा गया?

नारियल, ॐ, नींबू और राफेल, राफेल पर ॐ को ड्रामा बताने वाले INS अरिहंत पर नारियल फोड़ा करते थे

दूसरा सवाल क्‍या मोदी सरकार के कार्यकाल में सिर्फ हिंदू परंपराओं का पालन होता है? ये तस्‍वीर जो आप देख रहे हैं, वह 4 सितंबर 2019 की है, जब अपाचे को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया. इसमें एक पंडित मंत्रोच्‍चार करते दिख रहे हैं जबकि कई अन्‍य धर्मों के गुरु भी वहां खड़े हुए हैं. 2019 में भी मोदी सरकार ही सत्‍ता में थी. मतलब सभी धर्मों का बराबर सम्‍मान रखा गया है. संभव है कि राफेल जब भारत आए तो इसी तरह उस वक्‍त भी पूजा कराई जाए.

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तीसरा और सबसे ज्‍यादा गौर करने वाला सवाल यह है कि क्‍या वाकई राफेल पर ॐ लिखने से भारत का सेक्‍युलरिज्‍म खतरे में पड़ जाता है? तो जवाब यह है कि संविधान की मूल प्रति पर छपी राम, कृष्ण और नटराज की तस्वीरें क्‍या सेक्‍युलरिज्‍म की भावना का विरोध करती हैं? जाहिर है नहीं, भारत के संविधान की भावना सर्वधर्म सम्‍भाव की है. क्‍या महात्‍मा गांधी का बार-बार रामराज्‍य का जिक्र करना, सांप्रदायिकता थी? जवाब है, राम हिंदुस्‍तान के सबसे बड़े ऑइकॉन हैं. ठीक वैसे ही राफेल पर ॐ लिखने का मतलब यह नहीं है कि भारत में बाकी धर्मों का सम्‍मान नहीं है.

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नारियल, ॐ और नींबू जैसे मुद्दे सोशल मीडिया पर सक्रिय समाज को बांटने वाले कुछ ऐसे लोगों को सूट करते हैं, जिनका अपना एजेंडा है. कम से कम कांग्रेस जैसी राष्‍ट्रीय पार्टी और मुस्लिम धर्मगुरुओं को इससे दूर रहना चाहिए. अंतिम वाक्‍य में कहूं तो राफेल पर ॐ लिखा जाना ठीक वैसा ही है, जैसे पंजाब में हिंदू, मुसलमान, सिख ‘वाहे गुरु’ का नाम आम बोलचाल में ले लेते हैं. वे ऐसा इसलिए करते हैं, क्‍योंकि वे सभी धर्मों का सम्‍मान करते हैं और मानते हैं ईश्‍वर एक.

ईश्‍वर को अलग-अलग धर्मों से बांधने कट्टरपंथी ही राफेल पर ॐ का विरोध करते हैं, जबकि सत्‍य तो यही है आप ॐ कहें, राम कहें, अल्‍लाह कहें या वाहे गुरु… ईश्‍वर तो एक ही है, उसके नाम अलग-अलग हैं, लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर हजारों ऐसे लोग सक्रिय हो गए हैं, जो दावा करते हैं कि उनका ईश्‍वर दूसरे धर्म के ईश्‍वर से ज्‍यादा श्रेष्‍ठ है, उनका रास्‍ता सही है और दूसरे का अलग, ऐसे जहर घोलने वाले कट्टरपंथी देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में जहर घोल रहे हैं.