अंदरूनी कलह और पारिवारिक झगड़ों ने तोड़ी क्षेत्रीय दलों की कमर

प्रचंड बहुमत के साथ एक के बाद एक राज्‍यों में सरकार बनाने वाली बीजेपी ने सिर्फ कांग्रेस को खत्‍म नहीं किया है बल्कि रीजनल पार्टीयों की भी जमीन खिसकी. हार के हाहाकार के बीच इन अंदरूनी कलह, परिवारों के बीच मतभेदों भी इस तरह सामने आए कि कई नई पार्टियां भी बन गईं.
bjp rise and regional parties downfall, अंदरूनी कलह और पारिवारिक झगड़ों ने तोड़ी क्षेत्रीय दलों की कमर

नई दिल्‍ली: महाराष्‍ट्र में रातों-रात बदले राजनीतिक घटनाक्रम के बाद देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार (23 नवंबर 2019) को सीएम पद की शपथ ले ली. शुक्रवार रात तक कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना के सरकार बनाने की कवायद चल रही थी, लेकिन ऐन मौके पर शरद पवार की पार्टी में तूफान आया और अजित पवार ने पलटी मारकर बीजेपी को समर्थन दे दिया.

2014 लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी और अमित शाह के राष्‍ट्रीय पटल पर आने के बाद से जिस तरह बीजेपी को जीत मिल रही है, उससे लगातार क्षेत्रीय दलों का बेस कम हो रहा है. प्रचंड बहुमत के साथ लगातार एक के बाद एक राज्‍यों में सरकार बनाने वाली बीजेपी ने सिर्फ कांग्रेस को ही खत्‍म नहीं किया है बल्कि रीजनल पार्टीज की भी जमीन खिसकी है और न केवल जमीन खिसकी है, बल्कि हार के हाहाकार के बीच इन पार्टियों में झगड़े, अंदरूनी कलह, परिवारों के बीच मतभेदों भी इस तरह सामने आए कि कई नई पार्टियां भी बन गईं.

सबसे ताजा उदाहरण महाराष्‍ट्र में एनसीपी का है, जहां पर शरद पवार और भतीजे अजित पवार के बीच ही तलवारें खिंच गई हैं. इससे पहले अखिलेश यादव और शिवपाल, नीतीश कुमार-शरद यादव, शशिकला-पन्‍नीरसेल्‍वम, चौटाला परिवार में भी फूट पड़ चुकी है. आइए डालते हैं उन क्षेत्रीय दलों पर एक नजर, जिनमें पड़ चुकी है फूट.

समाजवादी कुनबा हो गया दो फाड़

समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच भी तलवारें खिंच गईं. नौबत यहां तक आ गई कि शिवपाल सिंह यादव ने नई पार्टी बना ली. 2019 लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने मायावती के साथ वर्षों पुरानी दुश्‍मनी भुलाकर चुनाव लड़ा. हालांकि, इसका चुनाव परिणाम पर कोई खास असर नहीं पड़ा और समाजवादी पार्टी विधानसभा चुनावों के साथ लोकसभा चुनावों में भी बुरी तरह हारी.

सत्‍ता संघर्ष की चपेट में लालू यादव का परिवार भी आया

बिहार में लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी में सत्‍ता संघर्ष चल रहा है. तेज प्रताप यादव कुछ महीने पहले खुलकर भाई और पिता के खिलाफ बगावत कर चुके हैं. इतना ही नहीं, तेजस्‍वी यादव और लालू प्रसाद यादव के बीच भी फैसलों को लेकर सहमति नहीं पा रही है.

शरद यादव ने भी बना ली अलग पार्टी

नरेंद्र मोदी और अमित शाह के राष्‍ट्रीय पटल पर आने के बाद एनडीए की सहयोगी जेडीयू भी दोफाड़ हुई. एनडीए छोड़कर नीतीश कुमार ने महागठबंधन बनाया तब तक तो सब ठीक है. शरद यादव और नीतीश कुमार के बीच उस वक्‍त मतभेद उभर गए जब जेडीयू ने एनडीए में वापस जाने का फैसला किया. नीतीश कुमार के इस फैसले से शरद यादव नाराज हो गए और जेडीयू से नाता तोड़कर अलग पार्टी बना ली.

हरियाणा में भी कमजोर हुई क्षेत्रीय पार्टी

देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के कुनबे में भी टूट हो चुकी है. पारिवारिक झगड़े के बाद इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) टूट और दुष्‍यंत चौटाला ने जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) बना ली. इनेलो की कमान इस समय अजय चौटाला के पास है, जबकि जेजेपी 2019 हरियाणा विधानसभा चुनाव में किंगमेकर बनी. जेजेपी के लीडर दुष्‍यंत चौटाला इस समय हरियाणा के डिप्‍टी सीएम हैं और मनोहर लाल खट्टर सरकार में भागीदार हैं.

भजनलाल परिवार की फीकी पड़ी चमक

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई भी हरियाणा की राजनीति में कद्दावर चेहरा रहे, लेकिन उनके परिवार में भी टूट हो गई है. कुलदीप पहले कांग्रेस में हुआ करते थे, लेकिन साल 2007 में उन्होंने हरियाणा जनहित कांग्रेस-भजनलाल नाम की पार्टी बना ली. साल 2011 में चौधरी भजन लाल के स्वर्गवास के बाद 2014 के आते-आते इस परिवार की चमक फीकी पड़ने लगी.

तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक भी हुई फूट की शिकार

तमिलनाडु में सत्तारूढ़ ऑल इंडिया अन्नाद्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) में भी जयललिता के निधन के बाद फूट पड़ गई. पार्टी में पन्नीरसेल्वम के साथ वरिष्ठ अन्नाद्रमुक नेता और तमिलनाडु विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष पीएच पांडियन ने एकसाथ शशिकला के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया था. शशिकला इस समय जेल में हैं और पलानीस्‍वामी सीएम, पन्‍नीरसेल्‍वम डिप्‍टी सीएम.

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