सुषमा स्वराज की पहली पुण्यतिथि: विरोधी भी करते थे सम्मान, पढ़ें- राजनीतिक सफर के कुछ किस्से

सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि (Sushma Swaraj Death Anniversary) के मौके पर देश उन्हें याद कर रहा है. उनके उन साहसी कार्यों को याद कर रहा है, जो उन्होंने विदेश मंत्री के तौर पर लोगों की मदद करके किए.
sushma swaraj first death anniversary, सुषमा स्वराज की पहली पुण्यतिथि: विरोधी भी करते थे सम्मान, पढ़ें- राजनीतिक सफर के कुछ किस्से

भारतीय राजनीति में सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) एक ऐसा नाम था, जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकता. हाजिर जवाब, अपनी रणनीति और लोगों की मदद के लिए हमेशा खड़ी रहने वालीं सुषमा स्वराज की आज पहली पुण्यतिथि (Sushma Swaraj First Death Anniversary) है. सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि के मौके पर देश उन्हें याद कर रहा है. उनके उन साहसी कार्यों को याद कर रहा है, जो उन्होंने विदेश मंत्री के तौर पर लोगों की मदद करके किए.

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आज हम आपके साथ सुषमा स्वराज से जुड़े उन किस्सों को शेयर करेंगे, जो कि शायद आपने सुने और पढ़े होंगे या कुछ लोग इनसे बेखबर हैं. इन किस्सों को याद करने से पहले यह देख लेते हैं कि दिवंगत नेता को किस-किसने श्रद्धांजलि दी है.

हे कृष्ण मेरी मां का ख्याल रखना…

पहली पुण्यतिथि के मौके पर सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज ने एक इमोशन पोस्ट के जरिए मां को याद किया है. बांसुरी ने मां क पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “मां तुम हमेशा मेरे साथ मेरी शक्ति के रूप में हो. हे कृष्ण मेरी मां का ख्याल रखना.”

कई नामी हस्तियों ने भी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की दिवंगत नेता सुषमा स्वराज को उनकी पहली पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी है.

जब सोनिया गांधी को सुषमा स्वराज ने दी कड़ी टक्कर

तेजस्वी और शक्तिशाली दिवंगत सुषमा स्वराज एक ऐसी राजनेता थीं, जिन्होंने अपने लंबे राजनीतिक कार्यकाल कई भूमिकाएं निभाईं. उन्हें भले ही सबसे अधिक याद विदेश में मुसीबत में फंसे भारतीयों की मदद करने के लिए जाना जाता हो, लेकिन अगर अतीत में देखा जाए तो सुषमा का सोनिया गांधी के खिलाफ बेल्लारी में ‘विदेशी बहू’ बनाम ‘भारतीय नारी’ का चुनावी मुकाबला भी काफी अहम था. यह बात 1999 लोकसभा चुनाव की है.

बेल्लारी तब कांग्रेस के लिए सुरक्षित सीट मानी जाती थी. उस समय बीजेपी के लिए तत्कालीन नई कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ लड़ना काफी महत्वपूर्ण था, क्योंकि विदेशी मूल उस समय का दूसरा अहम राजनीतिक मुद्दा था. कन्नड़ में भाषण देने के चलते सुषमा ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान न केवल बेल्लारी बल्कि कर्नाटक की जनता का भी दिल जीता था. हालांकि इन चुनाव में सुषमा स्वराज को हार का सामना करना पड़ा था. पर उन्होंने उन दिनों चुनाव प्रचार के दौरान जो प्रदर्शन किया, वो हर किसी के दिल में बस गया.

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सालों से पाकिस्तान में रह रही मूक-बधिर गीता को लाई थीं वापस

सुषमा स्वराज ने अपने कार्यकाल में हमेशा उन लोगों की मदद करने की कोशिश की, जो कि विदेश में किसी न किसी कारणवश फंसे हुए थे या फिर उन्हें मदद की बहुत जरूरत थी. लोगों की मदद के लिए सुषमा स्वराज हमेशा तैयार रहती थीं. सुषमा स्वराज ऐसे लोगों के लिए भगवान के रूप में सामने आईं. इनमें से ही एक थी गीता, जिसे पाकिस्तान से भारत लाने के लिए सुषमा स्वराज ने जी-जान लगा दी थी.

पाकिस्तान की एक सामाजिक संस्था में बचपन से रह रही मूक-बधिर गीता के माता-पिता के भारत में होने की जानकारी मिलने पर सुषमा स्वराज गीता को माता-पिता से मिलाने का वादा करके भारत लेकर आई थीं. गीता अक्टूबर 2016 को दिल्ली आई और फिर उसे इंदौर के नंबर 71 में स्थित एक मूक-बधिर संगठन को सौंपा गया.

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राजनीतिक विरोधियों ने भी माना लोहा

15वीं लोकसभा (2009-14) में विपक्ष की नेता रहीं सुषमा स्वराज का लोहा उनके राजनीतिक विरोधी भी मानते थे. एक बार संसद में खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि मैं उनकी (स्वराज) तरह ओजस्वी वक्ता नहीं हूं.

दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त

साल 2019 में शीला दीक्षित और सुषमा स्वराज दोनों का निधन एक महीने के भीतर हो गया था. शीला दीक्षित ने 21 जुलाई, 2019 को अंतिम सांस ली, तो वहीं 6 अगस्त, 2019 को सुषमा स्वराज ने दुनिया को अलविदा कहा था. दोनों ही दिल्ली की महिला मुख्यमंत्री रहीं.

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सुषमा स्वराज को दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त था. मुख्यमंत्री बनने से पहले वह दो बार दक्षिणी दिल्ली संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीतकर अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री बनी थीं. बाद में वह दिल्ली की सियासत से दूर चली गई थीं.

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