जब ऑपरेशन हो जाए तो फोन पर ‘बंदर’ बोल देना, IAF अधिकारी ने खोले बालाकोट मिशन के राज

रिटायर होने के बाद एयर मार्शल सी हरि कुमार ने खुद मिशन बालाकोट की पूरी कहानी बताई. पढ़िए सवालों के जवाब.

इस साल 14 फरवरी को जब पाकिस्तान परस्त आतंकियों ने पुलवामा में CRPF जवानों पर हमला किया तो पूरा देश बदले की आग में जलने लगा. जवानों की शहादत का बदला लेने में भारत सरकार ने भी देरी नहीं की.

पुलवामा हमले के महज 12 दिन बाद पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक कर आतंकी और उसके दर्जनों शिविर को नेस्तनाबूद कर दिया. 25-26 फरवरी की रात वायुसेना के विमानों ने बालाकोट में आतंकियों पर जो कहर ढाया उस सदमे से पाकिस्तान अभी तक उबर नहीं पाया है.

LOC पार कर बालाकोट में हमला करना इतना आसान नहीं था. पुलवामा हमले के बाद ही एयरस्ट्राइक करने का ब्लूप्रिंट तैयार हो गया था लेकिन इसके लिए किसी तेज तर्रार और काबिल ऑफिसर की जरूरत थी. फिर उस मिशन के लिए एयर मार्शल सी हरि कुमार को जिम्मा सौंपा गया.

ये एयर मार्शल सी हरि कुमार का नेतृत्व था कि हमारे वायुसेना के वीर बालाकोट में जाकर जैश-ए-मोहम्माद के आतंकियों पर बम बरसाकर सफलतापूर्वक देश लौट लाए. अब रिटायर होने के बाद एयर मार्शल सी हरि कुमार ने खुद मिशन बालाकोट की पूरी कहानी बताई.

  • सवाल- स्ट्राइक का फैसला कब और कैसे लिया गया?

जवाब- 14 फरवरी को जब पुलवामा में हमला हुआ, उसी दिन एयरफोर्स चीफ ने मुझसे बात की और कहा कि हमारी भूमिका की जरूरत पड़ सकती है. हमारे पास योजना होनी चाहिए. चीफ ने ही एयरस्ट्राइक का ऑप्शन दिया था.

  • सवाल- आपको टारगेट की जानकारी कब मिली?

जवाब- 25-26 फरवरी की रात तय हुई थी. उससे ठीक 7 दिन पहले हमें इसकी जानकारी दे दी गई थी.

  • सवाल- मिशन की रात क्या हुआ? उस शाम आपकी रिटायरमेंट पार्टी थी.

जवाब- रिटायरमेंट पार्टी पहले से तय थी, इसलिए मिशन की सीक्रेसी बनाए रखने के लिए उसे स्थगित नहीं किया. पार्टी में मैंने वेटर को बुलाया और कहा कि जूस और चीनी से बनी नॉन-अल्कोहलिक ड्रिंक लाकर दो ताकि रंग व्हिस्की सा दिखाई दे. एयरचीफ बीएस धनोआ मुझे लॉन की तरफ ले गए. उन्होंने कहा कि जब ऑपरेशन हो जाए तो फोन पर सिर्फ ‘बंदर’ बोल देना.

  • सवाल- बालाकोट में हमले की तारीख 25-26 फरवरी की रात ही क्यों चुना गया.?

जवाब- हम ऐसे समय हमला करना चाहते थे, जब सभी आतंकी एक जगह जमा हों. यह रात का समय हो सकता था. 19 फरवरी को पूर्णमासी थी. मिशन के समय 3 से 4 बजे तक चांद क्षितिज से 30 डिग्री पर होना था. ऐसे में चांदनी एकदम आदर्श थी.

  • सवाल- कितने टारगेट थे? हमला सिर्फ बालाकोट में ही क्यों?

जवाब- हम नागरिक आबादी को चपेट में नहीं लेना चाहते थे. जहां लोगों को नुकसान हो सकता था, वे निशाने छोड़ दिए. मकसद सिर्फ आतंक पर चोट करना था. इसलिए बालाकोट को निशाना बनाया.

  • सवाल- एयरस्ट्राइक में क्या ऐसी स्थिति बनी जिससे आपकी धड़कनें बढ़ गई हों?

जवाब- हां, एक मौका आया था. जब हमारे फाइटर जब अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे थे तो हमने देखा कि रावलपिंडी के आकाश में पाक वायुसेना का एक टोही विमान गश्त कर रहा है. उन्हें वहां से भटकाने के लिए हमने दो सुखोई-30 और चार जगुआर विमानों को बहावलपुर की ओर तेजी से रवाना किया.

इसके बाद खतरा टल गया. हमारे फाइटर पोजिशन ले चुके थे. पहली एयरस्ट्राइक 3 बजकर 28 मिनट पर हुई और चार बजे तक मिशन पूरा हो गया था. सभी लड़ाकू विमान सुरक्षित लौटकर पश्चिमी कमान के दो अड्डों पर उतर गए.

  • सवाल- मिशन के दौरान पाकिस्तानी एयरफोर्स की क्या प्रतिक्रिया थी?

जवाब- इस स्ट्राइक से वे हक्के-बक्के रह गए. हमने गौर किया कि स्ट्राइक के तुरंत बाद उनके विमान बालाकोट में मंडरा रहे थे. शायद उन्हें लग रहा था कि एक और स्ट्राइक होने वाली है.

ये है वो विजयीगाथा जिसपर आज पूरा हिंदुस्तान गर्व कर रहा है, क्योंकि हमने दुश्मन देश में जाकर आतंक की मांद में घुसकर आतंकियों को मौत के घाट उतारा था.

इस पूरे ऑपरेशन को एयर मार्शल सी हरि कुमार ने अंजाम दिया था लेकिन बालाकोट एयरस्ट्राइक की रणनीति से सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और NSA अजीत डोभाल जुड़े हुए थे और वो पल-पल की जानकारी ले रहे थे.

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