रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. हेमा साने, जिन्होंने 79 साल के जीवन में कभी बिजली इस्तेमाल नहीं की

डॉ. हेमा साने पुणे यूनिवर्सिटी से पीएचडी धारक हैं. एक कॉलेज में कई साल प्रोफेसर रह चुकी हैं. अपनी पूरी जिंदगी में उन्होंने कभी बिजली का इस्तेमाल नहीं किया.
Hema Sane, रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. हेमा साने, जिन्होंने 79 साल के जीवन में कभी बिजली इस्तेमाल नहीं की

लोकसभा चुनाव चल रहे हैं. इस माहौल में किसी से भी पूछिए, सड़क पानी के अलावा मुख्य मुद्दा बिजली है. हो भी क्यों न, रात में 10 मिनट के लिए गर्मी में बिजली चली जाए तो हालत खराब हो जाती है. हर मौसम में बिजली बुनियादी जरूरत है. लेकिन एक बुजुर्ग महिला ने अपने 79 साल के जीवन में कभी बिजली इस्तेमाल नहीं की. बिजली से उनकी दूरी की वजह पर्यावरण प्रेम है.

Hema Sane, रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. हेमा साने, जिन्होंने 79 साल के जीवन में कभी बिजली इस्तेमाल नहीं की

पुणे में बुधवार पेठ इलाका है. यहां 79 साल की डॉक्टर हेमा साने रहती हैं. हेमा सावित्री बाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से वनस्पति विज्ञान में पीएचडी की डिग्री ले चुकी हैं. गरवारे कॉलेज में कई साल प्रोफेसर रह चुकी हैं. डॉ हेमा साने ने अपने जीवन में कभी भी बिजली का इस्तेमाल नहीं किया. वो कहती हैं ‘मैंने कभी अपनी पूरी जिंदगी में बिजली की जरूरत महसूस नहीं की. लोग अक्सर पूछते हैं कि मैं कैसे बिना बिजली के जिंदगी जी लेती हूं, तो मैं उनसे पूछती हूं कि आप कैसे बिजली के साथ जिंदगी जीते हैं?’

Hema Sane, रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. हेमा साने, जिन्होंने 79 साल के जीवन में कभी बिजली इस्तेमाल नहीं की

एक छोटी सी झोपड़ी में रहने वाली हेमा तमाम पेड़ पौधों से घिरी हैं. बहुत सी चिड़ियां वहां रहती हैं. हेमा कहती हैं कि ये सब पक्षी मेरे दोस्त हैं. मैं अपने घर में काम करती हूं तो ये आ जाते हैं. मैं यहां से जाना नहीं चाहती, इन सबके साथ ही रहना चाहती हूं. अगर मैं चली गई तो इनकी देखभाल कौन करेगा? लोग मुझे मुर्ख बुलाते हैं. मैं पागल हो सकती हूं, लेकिन मेरे लिए इसका कोई मतलब नहीं, मेरा जिंदगी जीने का यही तरीका है.

Hema Sane, रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. हेमा साने, जिन्होंने 79 साल के जीवन में कभी बिजली इस्तेमाल नहीं की

डॉ हेमा साने वनस्पति विज्ञान और पर्यावरण की बड़ी जानकार हैं. बहुत सी किताबें लिख चुकी हैं. अब भी लैंप की रोशनी में किताबें लिखती और पढ़ती रहती हैं. उनका ज्ञान पक्षियों और पेड़ पौधों पर ऐसा है कि उसका बस नाम ले लो या दिखा दो तो उसके बारे में सब कुछ बता देती हैं. पर्यावरण प्रेम और बिजली से दूरी की वजह से उनसे लोग वहां मिलने और उनके अनुभव जानने जाते रहते हैं.

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