पूर्व CJI ने हैदराबाद एनकाउंटर पर उठाए सवाल, कहा- क्या हम अराजकता वाले समाज की ओर बढ़ रहे

आरएम लोढ़ा ने कहा कि 'बलात्कारियों की लिंचिंग अतीत की हम्मूराबी की सभ्यता की याद दिला रही है. ऐसा लगता है कि हम उसी युग की तरफ जा रहे है.'

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा ने मानवाधिकार दिवस पर दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि हम हम्मूराबी सभ्यता की ओर बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज एक ओर मानवाधिकार दिवस मनाया जा रहा और दूसरी ओर हम बुनियादी मानवाधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष हो रहा है. हर जगह अराजकता का माहौल है. तेलंगाना की घटना इसका उदाहरण है.

आरएम लोढ़ा ने तेलंगाना में हुए पुलिस एनकाउंटर की घटना पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि जब एक मंत्री ही ऐसी हत्या को सही ठहराता है तो हम आप अपने ह्यूमन राइट की सुनिश्चितता की क्या उम्मीद कर सकते हैं? हम उस सभ्यता की तरफ बढ़ रहे है, जहां न्याय के लिए भीड़ की मानसिकता ही आधार होती थी. जहां खून का बदला खून हुआ करता था.

अपराधियों के बर्बर अपराध करने से नहीं डरने और पुलिस मुठभेड़ में चारों आरोपियों के मारे जाने को दुखद बताते हुए पूर्व CJI लोढ़ा ने कहा, ‘क्या हम अराजकता वाले समाज की ओर बढ़ रहे हैं.’

उन्होंने कहा, “बलात्कारियों की लिंचिंग अतीत की हम्मूराबी की सभ्यता की याद दिला रही है. ऐसा लगता है कि हम उसी युग की तरफ जा रहे है. किसी भी मामले में निष्पक्ष सुनवाई और प्राकृतिक न्याय आवश्यक है, लेकिन हम ये सब करके देश की न्याय प्रणाली को ध्वस्त कर रहे हैं.”

लोढ़ा ने आगे कहा, ‘देश के एक हिस्से में हर दिन बलात्कार और हत्या की घटनाएं हो रही हैं या दूसरा इस तरह के अपराध समाज में व्याप्त गहरी दुर्भावना को दर्शाते हैं.’

लोढ़ा ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और पुनर्वास में सहयोग के लिए ये निर्भया कोष साल 2013 में बनाया गया था. आंकड़े बताते हैं कि उस फंड का 90 प्रतिशत पैसा राज्यों द्वारा इस्तेमाल ही नहीं हो पाया है. इस समय हमारे देश में महिलाओं और बच्चों की स्थिति गंभीर है. हमारे लिए यह व्यवस्था को मजबूत करने का समय है.

उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर किसी को बाहर करना या अंदर करना संविधान की कसौटी में पूरा नहीं उतरता है. अभी इस बिल को अंतिम रूप नहीं दिया गया है. इसके कानून बनने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है.

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