रोहित शेखर की हत्या की FIR कॉपी में ये बातें निकलकर आईं सामने

16 अप्रैल को एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी.

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर की हत्या की एफआईआर कॉपी सामने आई है. एफआईआर में पुलिस को अस्पताल द्वारा सौंपी गई मेडिकल रिपोर्ट है. इस मेडिकल रिपोर्ट में लिखा है कि एम्बुलेंस को कॉल किया गया था, मौके पर एम्बुलेंस पहुंची और पाया कि एक कार में रोहित बेहोश हालत में थे और वह सांस नहीं ले रहे थे, इसके बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

एफआईआर के मुताबिक मैक्स अस्पताल की तरफ से पुलिस को जानकारी दी गई कि मरीज रोहित शेखर तिवारी, जिनकी उम्र 40 साल है उन्हें एमरजेंसी में उनकी पत्नी अपूर्वा द्वारा एमएलसी नंबर 6249/19 पर भर्ती कराया गया था.  इन्हें चेकअप के बाद डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया.  कॉल के आधार पर एसआई राकेश और कांस्टेबल भूपेंद्र को अस्पताल कॉल पर रवाना किया गया. रोहित शेखर तिवारी को जांच के बाद डॉक्टर मुरली मनोहर खत्री द्वारा मृत घोषित कर दिया गया. एमएलसी में लिखा गया था कि मरीज को मिस्टर राजीव ( जोकि घर पर काम करते हैं और दूर के रिश्तेदार भ हैं) के द्वारा मकान नंबर C329 डिफेन्स कॉलोनी से अस्पताल लाया गया था.

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16 अप्रैल को 4 बजकर 41 मिनट पर एम्बुलेंस की मांग की गई, मौके पर एम्बुलेंस पहुंची और पाया कि रोहित एक कार में बेहोश हालत में थे और वह सांस भी नहीं ले रहे थे. उन्हें एम्बुलेंस में लेकर अस्पताल आया गया, सीपीआर दिया गया लेकिन मरीज को न तो सांस आ रही थी, न ही जिंदगी का कोई साइन दिख रहा था. रोहित को एमरजेंसी में लाया गया. उस दौरान भी रोहित के शरीर में न ही कोई प्लस थी, न सांस आ रही थी. प्रोटोकॉल के हिसाब से दो ईसीजी की गई और उसके बाद रोहित को मृत घोषित कर दिया गया.

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इसके बाद पुलिस द्वारा एम्स की मोर्चरी में रोहित के शव को प्रिजर्व करवाया गया और सीनियर अफसर, एसएचओ समेत रोहित के घर गए. सबने सबूत जुटाए, मौके पर किसी ने भी कोई शक जाहिर नहीं किया. सबके बयान लिए गए और उसी के आधार से सीआरपीसी 174 अमल में लाई गई.

17 अप्रैल को एम्स के मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉक्टर आदर्श, अभिषेक, पूजा और डॉक्टर हेमन्त ने पोस्टमोर्टम किया. 18 अप्रैल को पोस्टमोर्टम रिपोर्ट नंबर 488-19 सील बंद लिफाफे में पुलिस को दी गई. जिसमे अप्राकर्तिक मौत, जुर्म 302 हत्या पाया गया और इसके हिसाब से आईपीसी की धारा 302 दर्ज की गई.