शहीद मेजर की पत्नी बोली- अगर श्रीनगर में पत्थरबाज एंबुलेस न रोकते तो आज मेरे पति जिंदा होते

शहीद मेजर सतीश दहिया की पत्नी सुजाता दहिया ने कहा कि मेरी व्यक्तिगत राय है मैंने जम्मू-कश्मीर को थोड़ा पास से देखा है, वो लोग बहुत ही गरीब है, 370 हटने से उनके पास रोजगार होगा, जिनको पत्थर फेंकने के पैसे बाहर से मिलते हैं.
शहीद मेजर, शहीद मेजर की पत्नी बोली- अगर श्रीनगर में पत्थरबाज एंबुलेस न रोकते तो आज मेरे पति जिंदा होते

नई दिल्ली: साइबर सिटी गुरुग्राम के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में रन फॉर सिक्योरिटी का आयोजन किया गया. पांच किलोमीटर लंबी दौड़ का आगाज ताऊ देवीलाल स्टेडियम से हुआ और बख्तावर चौक से वापस ताऊ देवीलाल स्टेडियम में आकर खत्म हो गई.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारणी के सदस्य इंद्रेश कुमार और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पहलवान गीता फौगाट और बाइचुंग भूटिया ने फ्लैग ऑफ करके ” रन फॉर सिक्योरिटी ” को रवाना किया इस मौके पर देश के लिए जान देने वाले 10 शहीदों के परिजनों को सम्मानित कर 51-51 हजार रुपए की सहायता राशि दी गई. इन परिवारों से टीवी9 भारतवर्ष के संवाददाता जीतेंद्र भाटी ने आर्टिकल 370 पर बातचीत की.

1- देश की पहली शहीद महिला अधिकारी लेफ्टिनेंट किरण सेखावत के पिता विरेन्द्र शेखावत – ये देश हित में है आतंकवादियों, अलगाववादियों और पत्थरबाजों से जैसे डील किया जाना था वैसा 370 की वजह से नहीं किया जा सका. इसे हटाना देशहित में है, आने वाले दिनों में ये समस्या ठीक हो जाएगी, मैं सरकार को धन्यवाद देता हूं.

2- शहीद मेजर संजीव लाथर की पत्नी शालिनी लाथर- अभी तक सरकार ने जितने काम किए हैं, अच्छे ही किए हैं, 370 हटाकर भी देश हित में ही काम किया है, अगर आप एक देश के नागरिक हैं तो आपको एक देश वाली फीलिंग भी आनी चाहिए, भविष्य में आतंकवाद थोड़ा कम हो जाए.

3- शहीद मेजर सतीश दहिया की पत्नी सुजाता दहिया- मेरी व्यक्तिगत राय है मैंने जम्मू-कश्मीर को थोड़ा पास से देखा है, वो लोग बहुत ही गरीब है, 370 हटने से उनके पास रोजगार होगा, जिनको पत्थर फेंकने के पैसे बाहर से मिलते हैं उनके पास उम्मीद होगी कि एक जगह है इंडिया जिसमें हम रहते हैं वो बहुत ब्यूटीफुल है, अगर ये पहले हो जाता तो शायद मैं अपनी पति को नहीं खोती, पत्थरबाजों ने एम्बुलैंस को श्रीनगर नहीं पहुंचने दिया. वहां कि जनता भी आतंकवाद नहीं चाहते वो भी अच्छे लोग हैं. उनको खुली छत खुला आसमान चाहिए. अब वो खुदको पहचानेंगे और अपने लिए कुछ कर पाएंगे.

4- शहीद कैप्टन कपिल कूंदु की मां सुनिता कुंदु- सरकार का कदम सराहनीय है, लेकिन अभी वक्त लगेगा सबकुछ इतना जल्दी सही नहीं होने वाला, विपक्ष तो खिलाफ बोलता ही है, वहां की जनता भी परेशान हो चुकी थी. अब वो लोगों को अपनाएंगे. हम अभी भी कश्मीर में जवानों को खो रहे हैं. हम सब शहीदों के परिवार का दर्द कश्मीर से ही जुड़ा है, हमें अपने परिवार का जो खोया है वहीं खोया है. पाकिस्तान के साथ साथ पाकिस्तान का भी सही इलाज होना चाहिए.

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