भारत-विरोधी गतिविधियों में न हो अफगान धरती का इस्तेमाल, अखंडता का सम्मान जरूरी: जयशंकर

एस जयशंकर ( S Jaishankar) ने कहा, “अफगानिस्तान के साथ हमारी दोस्ती मजबूत और अचल है. हम हमेशा से अच्छे पड़ोसी रहे हैं और आगे भी बने रहेंगे. हमारी यह उम्मीद है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल कभी भी भारत-विरोधी गतिविधियों में नहीं होना चाहिए.”

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  • Publish Date - 9:18 pm, Sat, 12 September 20

तालिबान-अफगानिस्तान वार्ता (Taliban-Afghan Dialogue) की शुरुआत के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में भारत (India) के विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने भी अपनी बात रखी. वो वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम से जुड़े. एस जयशंकर ने शनिवार को यह साफ कर दिया कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल कभी भी भारत-विरोधी गतिविधियों में नहीं होना चाहिए. जयशंकर ने कहा, “अफगानिस्तान के साथ हमारी दोस्ती मजबूत और अचल है. हम हमेशा से अच्छे पड़ोसी रहे हैं और आगे भी बने रहेंगे. हमारी यह उम्मीद है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल कभी भी भारत-विरोधी गतिविधियों में नहीं होना चाहिए.”

उन्होंने कहा कि शांति प्रक्रिया के दौरान अफगानिस्तान और पड़ोस में होने वाली हिंसा पर बात करनी होगी. साथ ही अल्पसंख्यकों और महिला अधिकारों की भी रक्षा करना होगी.

‘क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना होगा’

विदेश मंत्री ने कहा, “शांति प्रक्रिया को राष्ट्रीय संप्रभुता और अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना होगा. इसे मानवाधिकारों और लोकतंत्र की महत्ता को बढ़ावा देना होगा. जोकि विकास का मार्ग दिखा सकता है. अल्पसंख्यकों, महिलाओं और वैचारिक विरोधियों के हितों की रक्षा को सुनिश्चित करना होगा.”

उन्होंने कहा, “सबसे अहम बात, पूरे देश और पड़ोस में हो रही हिंसा पर प्रभावी तरीके से ध्यान देना होगा. बढ़ती हिंसा को बने रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती है. हम एक तत्काल और व्यापक युद्ध विराम का समर्थन करते हैं.”

‘अफगानिस्तान के साथ हमारी दोस्ती ऐतिहासिक’

जयशंकर ने ट्वीट करके लिखा कि अफगानिस्तान के साथ हमारी दोस्ती ऐतिहासिक है. हमारी 400 से अधिक विकास परियोजनाओं से अफगानिस्तान का कोई भी हिस्सा अछूता नहीं है. हमें विश्वास है कि यह सभ्यतागत संबंध आगे भी बढ़ता रहेगा.

अफगानिस्तान में स्थाई तौर पर शांति स्थापित करने की कोशिशें

अंतर-अफगान वार्ता की शुरुआत दोहा में हुई है, जिसमें अफगानिस्तान और तालिबान के प्रतिनिधि शांतिवार्ता में हिस्सा ले रहे हैं. इस बातचीत के तहत अफगानिस्तान में स्थाई तौर पर शांति स्थापित करने की कोशिशें चल रही हैं, जिसके लिए अमेरिका मध्यस्थता कर रहा है.