Saharanpur is heaven for the terrorists of Masood Azhar's jaish-e-mohammad pulwama attack, मसूद अज़हर के आतंकियों के लिए ‘जन्नत’ है सहारनपुर!
Saharanpur is heaven for the terrorists of Masood Azhar's jaish-e-mohammad pulwama attack, मसूद अज़हर के आतंकियों के लिए ‘जन्नत’ है सहारनपुर!

मसूद अज़हर के आतंकियों के लिए ‘जन्नत’ है सहारनपुर!

1994 में ही खालिस्तानी कट्टरपंथियों और मसूद अज़हर के आतंकियों का ‘संगम’ हो गया था. सहारनपुर के देवबंद से जैश-ए-मोहम्मद के 2 संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी ने कंधार विमान अपहरण कांड की वो ख़ौफ़नाक याद ताज़ा कर दी, जिसकी कहानी किसी रियल थ्रिलर से कम नहीं.
Saharanpur is heaven for the terrorists of Masood Azhar's jaish-e-mohammad pulwama attack, मसूद अज़हर के आतंकियों के लिए ‘जन्नत’ है सहारनपुर!

नई दिल्ली. जो लोग ये कहते हैं कि पंजाब में खालिस्तानी कट्टरपंथियों के साथ आतंकियों का ख़तरनाक संगम हो रहा है, तो वो ये ज़रूर जान लें कि ये सबकुछ 25 साल से चल रहा है. और भारत इसकी बहुत बड़ी क़ीमत 25 साल से चुका रहा है. यूपी एटीएस ने सहारनपुर के देवबंद से जैश-ए-मोहम्मद के 2 संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी की है. सुरक्षा और ख़ुफ़िया एजेंसियां भी कह रही हैं कि जैश के आतंकियों ने पुलवामा हमले के लिए लंबे समय पहले से प्लानिंग की थी. ये जानकर आप हैरान रह जाएंगे कि 1999 में कंधार विमान अपहरण कांड से पांच साल पहले ही मसूद अज़हर के आतंकियों ने किडनैपिंग की रियल रिहर्सल कर ली थी.

चोरी की गाड़ी की तलाश में मिला आतंकी!
सहारनपुर से जैश के आतंकियों और मसूद अज़हर के पुराने कनेक्शन को समझने के लिए 1994 की इस घटना का ज़िक्र ज़रूरी है, जिसमें चोरी की गाड़ी से मसूद के आतंकियों का सुराग मिला था. सितंबर 1994 के आख़िरी हफ्ते में गाज़ियाबाद के साहिबाबाद थाने की पुलिस को एक सूचना मिली. ख़बर ये थी कि गाज़ियाबाद के मसूरी इलाके में कुछ संदिग्ध लोग चोरी की गाड़ियों का कारोबार करते हैं. साहिबाबाद थाने के प्रभारी ध्रुव लाल सूचना मिलते ही अपने हमराह राजेश यादव को लेकर मौक़े पर पहुंचे. यहां पुलिस को कुछ नहीं मिला, क्योंकि चोरों को शायद ख़बर लग चुकी थी. मगर, उस मकान से एक आदमी मिला, जिसने अपना नाम बताया रोहित शर्मा. वो कई देशों की भाषाएं बोलता था, जिसकी वजह से पुलिस चार दिनों तक उससे कुछ भी ठोस बात नहीं जान सकी. कथित रोहित शर्मा पुलिस को पूरे चार दिन तक गुमराह करता रहा. पुलिस ने थोड़ी सख़्ती दिखाई तो रोहित शर्मा ने बताया कि उसका असली नाम अहमद उमर सईद शेख़ है. यहां आपको बताना ज़रूरी है कि उमर शेख़ वही ख़ूंख़ार आतंकी है, जिसे मसूद अज़हर के साथ रिहा किया गया था और वो ब्रिटिश पत्रकार डेनियल पर्ल का हत्यारा है. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में 9/11 को हुए हमले में भी उसका हाथ माना जाता है. तब तक साहिबाबाद पुलिस को नहीं मालूम था कि उमर शेख़ हिंदुस्तान के लिए कितना ख़तरनाक है. सितंबर 1994 के पहले हफ़्ते में जम्मू-कश्मीर से 5 विदेशी नागरिकों का अपहरण हुआ था, जिनमें 3 ऑस्ट्रेलिया के और दो ब्रिटेन के थे. उमर शेख़ ने पुलिस को बताया कि वो उसमें शामिल था. साहिबाबाद के थाना प्रभारी ध्रुव लाल ने ये ख़बर सुनी तो उनके होश उड़ गए. उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री दफ्तर को ये सूचना दी. मुलायम सिंह उस समय यूपी के सीएम थे, उन्होंने थाना प्रभारी ध्रुव लाल को ऑपरेशन लीड करने की सहमति दे दी. सहारनपुर के तत्कालीन एसएसपी आरएन श्रीवास्तव को सीएम दफ्तर से फोन आया कि सहारनपुर में आतंकी छिपे हैं और उन्हें गाज़ियाबाद पुलिस की मदद करनी है.

एनकाउंटर में मसूद के आतंकी ने 2 पुलिसवालों की हत्या की
साहिबाबाद के थाना प्रभारी ध्रुव लाल अपने हमराह (गश्त के दौरान साथ रहने वाले गनर) राजेश यादव को लेकर उमर शेख़ के साथ खाताखेड़ी पहुंचे. यहां उमर शेख़ ने अपने शातिर दिमाग़ से पुलिस टीम को धोखा दे दिया. जिस घर में आतंकियों ने 5 विदेशियों को छिपाकर रखा था, उसके ठीक बराबर वाले घर का पता बताया. थाना प्रभारी ध्रुव लाल और राजेश यादव ने जैसे ही उस घर में धावा बोला, तो वहां कोई नहीं मिला. उसी वक्त शोर-शराबे की वजह से बराबर वाले घर में छिपे आतंकी अलर्ट हो गए. आतंकियों ने घर के अंदर से ही फायरिंग की, जिसमें ध्रुव लाल और राजेश यादव की मौत हो गई. इसके बाद आतंकियों ने घर की पिछली दीवार को बम से उड़ाया और बाहर खड़ी वैन से फ़रार हो गए. पुलिस टीम को घर में 4 विदेशी नागरिक ज़िंदा मिले, जबकि एक ब्रिटिश नागरिक की आतंकियों ने हत्या कर दी थी. पुलिस ने काफ़ी पीछा किया, लेकिन आतंकी नहीं मिले. हालांकि, खाताहेड़ी से कुछ किलोमीटर की दूरी पर चिलकाना इलाके में आतंकियों की वैन बरामद हुई. इस वैन में फ़रार हुए आतंकियों का कभी कोई सुराग नहीं मिला. पुलिस ने उमर शेख़ को गिरफ्तार कर लिया और अदालत ने उसे जेल भेज दिया. हालांकि, जिस सहारनपुर में जैश के आतंकियों की मौजूदगी थी, उसी सहारनपुर में मसूद अज़हर, उमर शेख़ और अहमद ज़रगर की रिहाई की ज़मीन तैयार हुई.

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मसूद अज़हर की रिहाई की क़ीमत भारत आज तक चुका रहा है.

मसूद अज़हर की रिहाई के लिए सहारनपुर में बिछाई हॉटलाइन

24 दिसंबर 1999 को जब कंधार विमान अपहरण कांड हुआ, उस समय तालिबान और आतंकियों के बीच बातचीत की मध्यस्थता जमीयत-ए-उलेमा हिंद के तत्कालीन अध्यक्ष मौलाना असद मदनी ने की थी. रमज़ान के दिनों में असद मदनी से प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बात की. बातचीत के लिए रातों-रात हॉटलाइन बिछाई गई. इसी हॉटलाइन से पीएम वाजपेयी, गृह मंत्री और तालिबान की ओर से मुल्ला उमर बातचीत करते थे. आख़िरकार भारत सरकार ने आतंकियों के कब्ज़े से कई भारतीयों समेत 153 लोगों की सकुशल घर वापसी के लिए आतंकियों की मांगें मान लीं. 3 आतंकी छोड़े गए. मसूद अज़हर, उमर सईद शेख़ और अहमद ज़रगर की रिहाई की क़ीमत भारत आज तक चुका रहा है. जैश के आतंकियों से सहारनपुर का पुराना कनेक्शन एक बार फिर सामने आया है. इस बार ख़ुफ़िया और सुरक्षा एजेंसियों के लिए सहारनपुर समेत पूरे देश में जैश के आतंकी नेटवर्क को तबाह करना ज़रूरी है.
(पश्चिमी यूपी के वरिष्ठ पत्रकार रियाज़ हाशमी से बातचीत के आधार पर)

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