उद्धव ठाकरे नहीं शिवसेना के मैजिक मैन होंगे महाराष्ट्र के अगले सीएम!

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले सीटों के बंटवारे को लेकर बीजेपी से तकरार हो या फिर चुनाव परिणाम के बाद 50-50 फॉर्मूले का ज़िक्र. शिवसेना की तरफ से हमेशा...
Maharashtra Govt Formation, उद्धव ठाकरे नहीं शिवसेना के मैजिक मैन होंगे महाराष्ट्र के अगले सीएम!

शिवसेना सांसद संजय राउत की मानें तो सीएम पद को लेकर सहमति बन गई है. इतना ही नहीं यह भी स्पष्ट किया है कि अगले पांच सालों तक राज्य में शिवसेना का ही मुख्यमंत्री होगा. लेकिन शिवसेना की तरफ से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा इस बात को लेकर उन्होंने कुछ नहीं कहा.

हालांकि शिवसेना की तरफ से मुख्यमंत्री उम्मीदवार कौन होगा? इसको लेकर मीडिया में कई ख़बरे चल रही है. माना जा रहा है कि शिवसेना का मैजिक मैन यानी कि संजय राउत मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे. यानी कि अगर शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की सरकार बनी तो संजय राउत महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री होंगे.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एनसीपी भी संजय राउत के नाम पर सहमत हो गए हैं. गौरतलब है कि इससे पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार उद्धव ठाकरे को सीएम बनाना चाहते थे. लेकिन बीमारी का हवाला देते हुए उद्धव ठाकरे ने सीएम पद लेने से मना कर दिया है.

संजय राउत को क्यों कहते हैं शिवसेना का मैजिक मैन?

महाराष्ट्र की राजनीति में आज सबसे चर्चित नाम है शिवसेना सांसद संजय राउत का. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले सीटों के बंटवारे को लेकर बीजेपी से तकरार हो या फिर चुनाव परिणाम के बाद 50-50 फॉर्मूले का ज़िक्र. शिवसेना की तरफ से संजय राउत हमेशा ही आग उगलते रहे हैं.

शिवसेना, बीजेपी की सहयोगी होते हुए भी गठबंधन के ख़िलाफ़ खुलकर बोलती रही और इसके सूत्रधारक रहे हैं संजय राउत. राउत शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेहद क़रीबी हैं. माना जाता है कि मराठी मानुष के मुद्दे से हिंदुत्व की तरफ शिवसेना का रुख़ भी राउत के कहने पर ही हुआ था.

यहां तक कि सामना को हिंदी में निकालने का सुझाव भी संजय राउत का ही था.

80 के दशक में क्राइम रिपोर्टिंग करते थे संजय राउत

संजय राउत 80 के दशक में क्राइम रिपोर्टिंग करते थे और उनके सोर्स हुआ करते थे अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम.

दाऊद उन्हें ख़बर देने के लिए एक्सप्रेस टॉवर स्थित उनके ऑफ़िस आते थे. हालांकि तब दाऊद इब्राहिम मुंबई के छोटे-मोटे गुंडे हुआ करते थे.

उस दौर में मुंबई में अंडरवर्ल्ड और गैंगवार की ख़बरें छाई रहती थी. ऐसे में दाऊद की ख़बरें उनके लिए फ़ायदेमंद रहीं.

संजय राउत अपनी ख़बरों के लिए हमेशा चर्चा में रहे, जबकि वो क्राइम रिपोर्टिंग करते हुए कभी भी पुलिस थाने तक नहीं गए. न ही कभी किसी पुलिस अधिकारी से मिले. प्रसिद्धि के बीच राउत ने पॉलिटिकल रिपोर्टिंग भी शुरू की.

राउत की लेखनी के कायल थे बालासाहेब ठाकरे

राउत पहले शिवसेना के मुखपत्र ‘मार्मिक’ में लिखते थे. शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे उनकी लेखनी के कायल थे. इस वजह से राउत को 90 के दशक की शुरुआत में ही सामना का कार्यकारी संपादक बना दिया गया. तब राउत की उम्र महज़ 29 साल थी. तब से अब तक वो लगातार सामना के संपादक बने हुए हैं.

शिवसेना की कोई भी रणनीति संजय राउत के सहमति के बिना नहीं बनती. यही वजह है कि मीडिया में शिवसेना का पक्ष आम तौर पर संजय राउत ही रखते हैं. पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे विशेष परिस्थिति या निर्णय सुनाने के लिए ही मीडिया के सामने आते हैं.

आंबेडकर कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई करने वाले संजय राउत को 2004 में शिवसेना ने राज्यसभा से सांसद बनाया. इतना ही नहीं अपर हाउस में वो शिवसेना संसदीय दल के नेता भी हैं.

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