32 साल पहले ज्वाइन की थी सौ साल पुरानी ITC कंपनी, अब बने ग्रुप के चेयरमैन

देश की सबसे पुरानी और सफल कंपनियों में से एक में नेतृत्व बदल गया है. इस कंपनी के बारे में आपको ज़रूर जानना चाहिए क्योंकि आप भी शर्तिया इसके ग्राहक होंगे.

आप कभी दिल्ली के मौर्या होटल, मुंबई के ग्रैंड मराठा या जयपुर के आलीशान राजपूताना होटल में ठहरे हैं? क्या कभी आशीर्वाद आटे से बनी रोटियां खाई हैं? क्लासमेट कंपनी की कॉपियां तो ज़रूर इस्तेमाल की होंगी?  बिंगो चिप्स, सनफीस्ट के बिस्किट या कैंडीमैन की टॉफी तो चखी ही होगी!!

क्या आपको मालूम है कि ये सारे प्रोडक्ट एक ही कंपनी ITC के हैं? हैरान मत होइए क्योंकि इससे भी बड़ी हैरानी की बात आपका इंतज़ार कर रही है. वो ये कि कभी ये ग्रुप सिगरेट बनानेवाली कंपनी के नाम से मशहूर था. विल्स नेवी कट, गोल्ड फ्लेक, कैप्सटन, क्लासिक ब्रांड की सारी सिगरेट ITC की ही पैदाइश हैं. एशिया में बिकनेवाली 81% सिगरेट ITC  की ही फैक्ट्री में बनती हैं.

दरअसल ये कंपनी आजकल खबरों में है. खबरों में इसलिए क्योंकि दो दशकों के बाद इसका नेतृत्व परिवर्तन हुआ है. 72 साल के वाई सी देवेश्वर का निधन होने के बाद संजीव पुरी की ताजपोशी चेयरमैन पद पर हुई. अब तक पुरी मैनेजिंग डायरेक्टर थे, हालांकि ग्रुप की कॉरपोरेट मैनेजमेंट कमेटी में वो पहले से ही चेयरमैन थे और तमाम अहम फैसलों में शामिल रहे हैं.

अगर बात संजीव पुरी की करें तो उनका करियर भी ITC की तरह ही रहा. एक बार उड़ान भरी तो आसमान तक जा पहुंचे.

पुरी ने अमेरिका के वाटर्न स्कूल ऑफ बिज़नेस और आईआईटी कानपुर से पढ़ाई की है. साल 1986 में उन्होंने ITC में प्रवेश किया. साल 2006 में वो ITC इन्फोटेक संभालने लगे. 3 साल बाद उन्हें ITC इंडिया के तंबाकू विभाग का संभागीय मुख्य कार्याधिकारी बनाया गया. कंपनी की मार्केटिंग और वितरण का ज़िम्मा भी उन्हें दिया गया. 2014 में पुरी को ग्रुप के एफएमसीजी बिज़नेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. इस दौरान उन्होंने अहम अधिग्रहण किए.