राज्यसभा में पहली बार बोली गई संथाली, सभापति ने की सराहना

सभापति एम वेंकैया नायडू शून्यकाल के दौरान अपनी भाषा का इस्तेमाल करने को प्रोत्साहित करते हैं.

राज्यसभा में शुक्रवार को संथाली भाषा पहली बार बोली गई. बीजद सदस्य सरोजिनी हेम्ब्रम ने शून्यकाल के दौरान लोक महत्व का मामला संथाली भाषा में उठाया. सभापति एम वेकैंया नायडू और उप सभापति हरिवंश ने इसकी तारीफ की. संथाली में अपनी बात रखते हुए सरोजिनी ने इसकी लिपि ‘ओल चिकी’ के निर्माता पंडित रघुनाथ मुर्मू को भारत रत्न देने की मांग की.

सरोजिनी हेम्ब्रम ने कहा कि पंडित मुर्मू ने 1925 में संथाली की लिपि तैयार की थी. आदिवासी जनजीवन में उनका बहुत खास स्थान है और राज्य में उन्हें महान सांस्कृतिक आदर्श का दर्जा दिया गया है. सभापति नायडू ने सराहना की कि सदन में पहली बार संथाली बोली गई है वह भी एक महिला सदस्य के द्वारा.

सभापति नायडू शून्यकाल के दौरान सदस्यों को लोक महत्व से जुड़े मुद्दों को अपनी भाषा में सदन में रखने के लिए प्रोत्साहित करते रहते हैं. इसके साथ ही वे स्थानीय भाषा में दिए गए भाषण का हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद की उपलब्धता भी सुनिश्चित करते हैं. संथाली का दोनों भाषाओं में अनुवाद उपलब्ध था. सभापति ने बताया कि संथाली से हिंदी में अनुवाद करने वाली पीएचडी की छात्रा है.

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